परिभाषा :- छ: प्रकार की रुचियां जीभ के संयोग में आई वस्तु चाहे तरल, विरल, ठोस क्यों न हो, परिणाम स्वरूप ही पहचानना होता है । हर जागृत मानव संदवेदनाओं के प्रयोजनों का स्वस्थ शरीर के प्रयोजनों के लिए पहचाने रहना स्वाभाविक रहता है ।
शीत/उष्ण:- पोषण/शोषण
खट्टा :- पोषण/शोषण
मीठा :- पोषण/शोषण
चरपरा :- पोषण/शोषण
कड़ुवा :- पोषण/शोषण
कसैला :- पोषण/शोषण
खारा :- पोषण/शोषण
सुगन्ध/दुर्गन्ध :- प्रश्वसन/विश्वसन
सुरूप/कुरूप :- अपनापन/परायापन
पोषण :- इकाई + अनुकूल इकाई ।
शोषण :- इकाई - अनुकूल इकाई ।
:- इकाई + प्रतिकूल इकाई ।