• रचना :- पदार्थ की अवधि की ‘रचना या वस्तु’ संज्ञा है, जिसकी गणना की जाती है।
  • विस्तार :- रचना की अवधि की ‘विस्तार’संज्ञा है ।
  • सम :- उद्भववादी गुणों की ‘सम’ संज्ञा है ।
  • विषम :- प्रलयवादी गुणों की ‘विषम’ संज्ञा है ।
  • मध्यस्थ :- विभववादी गुणों की ‘मध्यस्थ’ संज्ञा है ।
  • # सम, विषम तथा मध्यस्थ गुणों को ही क्रमश: रजोगुण, तमोगुण तथा सतोगुण संज्ञा से भी जाना जाता है ।
  • संपूर्ण परमाणुओं में पाई जाने वाली क्रिया के लिए प्राप्त ऊर्जा रूपी सत्ता की निरपेक्ष कारण संज्ञा है । निरपेक्ष सत्ता का तात्पर्य जिसका उत्पत्ति क्रम का कारण न हो और नित्य स्थिति में हो ।
  • परमाणु-व्यूहों में सहवास से जो प्रभाव-विशेष है, क्रिया, प्रतिक्रिया एवं परिपाक है उसे ‘सापेक्ष कारण’ संज्ञा है ।
  • अनेक अणु-परमाणुओं से संगठित पिण्ड व उनकी क्रिया को ‘स्थूल-क्रिया’ और परमाण्विक क्रिया को ‘सूक्ष्म-क्रिया’ संज्ञा है ।
  • गति, कंपन और तरंग भेद से सूक्ष्म गतियाँ तथा क्रि याएँ हैं ।
  • इकाई में कंपन क्रिया का बढ़ जाना ही विकास की घटना है, तथा इसके विपरीत में ह्रास की घटना है ।
  • चैतन्य इकाई में कम्पन की अधिकता ही विशेषता है ।
  • ज्ञान में पारदर्शकता के अंशानुसार चैतन्य इकाई भ्रांत, भ्रांताभ्रान्त तथा निर्भ्रान्त स्थिति में है ।
  • जड़ता में पारदर्शकता से अंधकार का अभाव, पारभासिकता से अंधकार का आंशिकता में अभाव तथा अपारदर्शकता से अंधकार है । अंधकार मूलतः छाया ही है ।
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