(1) लाभ-हानि मुक्त विनिमय हेतु सहअस्तित्ववादी दृष्टि व विनिमय पद्धति को प्रोत्साहित करने वाली नीति का निर्धारण करना ।
(2) श्रम मूल्य और श्रम विनिमय आधारित विनिमय पद्धति को विकसित करना ।
- ⁕ अंतर्राष्ट्रीय विनिमय लाभ-हानि रहित होना आवश्यक है, जो वस्तु व श्रम मूल्य के रूप में ही सफल है ।
- # 5. विद्याध्ययन सुरक्षा - अस्तित्व मूलक मानव केन्द्रित, मध्यस्थ दर्शन सहअस्तित्ववादी विचार विधि से विधिवत् स्थिति सत्य, वस्तुगत सत्य वस्तुस्थिति सत्य का अध्ययन कराने वाली जानकारी की ‘विद्या’ संज्ञा है ।
- ⁕ अध्ययन को सफल बनाने का दायित्व अध्यापक, अभिभावक अध्यापन तथा शिक्षा वस्तु और प्रणाली पर है, क्योंकि यह चारों परस्पर पूरक हैं ।
- ⁕ शिक्षा प्रणाली, अध्यापक, माता, पिता तथा अध्ययन यह सब एकसूत्रात्मक होने से ही सफल विद्याध्ययन पद्धति का विकास संभव है, जिससे कृतज्ञता तथा सहअस्तित्व का मार्ग प्रशस्त होता है ।
- ⁕ शिक्षा प्रणाली के लिये शिक्षा नीति के निर्धारण के लिये धर्म-नीति और अखण्ड समाज सार्वभौम व्यवस्था रूपी राज्य-नीति का निर्भ्रम ज्ञान आवश्यक है ।
- ⁕ शिक्षा नीति का आधार एवं उद्देश्य मानव में मानवीयता तथा सामाजिकता होना अनिवार्य है । मानवीयता ही सामाजिकता है जो सार्वभौमिक तथ्य है । इसलिए इसके आधारित शिक्षा प्रणाली से मानवीयता सम्पन्न नागरिकों का निर्माण होगा जिनकी सहअस्तित्व तथा पोषण में दृढ़ निष्ठा होगी ।
शिक्षा नीति का लक्ष्य है -
- ⁕ मानवीय दृष्टि, प्रवृत्ति व स्वभाव सहज ज्ञान-विवेक-विज्ञान सम्पन्न समझदारी, ईमानदारी, जिम्मेदारी, भागीदारी संपन्न नागरिकों का निर्माण, जिनमें अतिमानवीयता के लिये मार्ग प्रशस्त होता है ।
- ⁕ शिक्षा नीति की सफलता निम्न सूत्रों से है :-
(1) विज्ञान के साथ चैतन्य पक्ष का अध्ययन ।