• मन, वृत्ति, चित्त, बुद्धि व आत्मा जीवन में अभिन्न है । जीवन जागृति के स्थिति में, जीवन परंपरा में प्रमाणित होने वाली विभूतियाँ ( क्रियाएँ) बल और शक्ति के रूप में निम्न हैं :- आत्मा में दो विभूतियाँ, बुद्धि में चार, चित्त में सोलह, वृत्ति में छत्तीस व मन में स्थिति और गति में चौसठ विभूतियाँ (क्रियाएँ) पायी जाती है । उपरेाक्त सभी क्रियाओं को हर व्यक्ति प्रमाणित कर सकता है । इस प्रकार मानव (जीवन) में कुल स्थिति और गति अर्थात् बल और शक्ति के रूप में 122 क्रियाएं पायी जाती है ।
  • अनुभव और आनंद रूपी प्रमाण आत्मा में ;
  • अस्तित्व एवं परमानंद आत्मस्थ अनुभूति है ।
  • अस्तित्व (अनुभव) :- नाश रहित गुण । नित्य वर्तमान ।
  • परमानन्द (प्रामाणिकता) :- आत्मा की पारदर्शकता अथवा सहअस्तित्व में अनुभूति।
  • आनंद :- मध्यस्थ क्रिया सहज पूर्ण-बोध या आत्मबोध ।
  • धी :- निश्चय की निरंतरता ।
  • अस्तित्व (बोध) :- ज्ञान-ग्रहण एवं प्रभावीकरण क्षमता ।
  • धृति :- भय का अभाव ।
  • श्रुति :- यथार्थ रूपी ज्ञान, विवेक, विज्ञान का भाषाकरण । यथार्थ जानकारी का भाषाकरण ।
  • स्मृति :- बार-बार आवश्यकतानुसार, भाषापूर्वक समझदारी का प्रस्तुतीकरण ।
  • मेधा :- कला को धारण करने वाली क्रिया ।
  • श्री :- समृद्धि की स्वीकृति ।
  • संतोष :- अभाव का अभाव ।
  • कला :- उपयोगिता योग्य सुंदर क्रिया ।
  • कान्ति :- अज्ञान को क्षीण करने वाली प्रक्रिया ।
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