- ● मन को जो प्रिय हो, उसके चुनाव की प्रकिया की चयन संज्ञा है । मन में आस्वादन अपेक्षा पूर्वक चयन होता है ।
- ● चित्त सहज चित्रण के आठ क्रियायें - रूप, गुण, गणना, काल, विस्तार, श्रम, गति, परिणाम ।
- # न्यायपूर्ण व्यवहार तथा व्यवसाय के समत्व में सहअस्तित्व तथा समृद्धि, शरीर तथा हृदय के समत्व में तृप्ति, हृदय तथा प्राण के समत्व में आरोग्य तथा पुष्टि, प्राण एवं मन के समत्व में बल तथा स्फूर्ति, मन व वृत्ति के समत्व में सुख, वृत्ति व चित्त के समत्व में शांति, चित्त व बुद्धि के समत्व में संतोष, बुद्धि व आत्मा के समत्व में आनंद आत्मा तथा व्यापक सत्ता में नित्य समत्व है ही । इसीलिए परमानन्द सहज अनुभूति व प्रमाण है ।
- ● परमानन्द सहज अनुभूति ही मानव जीवन का चरम लक्ष्य है । परमानन्द सहअस्तित्व में अनुभव सहज वैभव है । यह जागृत जीवन में सहज क्रिया और अभिव्यक्ति है ।
Table of contents
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-20
मानव व्यवहार दर्शन
-19
विकल्प
-14
मध्यस्थ दर्शन के मूल तत्व
-8
लेखकीय
-6
संदेश
-4
मध्यस्थ दर्शन में प्रतिपादित मूल बिन्दु
-2
कृतज्ञता
1
1. सहअस्तित्व
4
2. कृतज्ञता
6
3. सृष्टि-दर्शन
17
4. मानव सहज प्रयोजन
47
5. निर्भ्रमता ही विश्राम
60
6. कर्म एवं फल
62
7. मानवीय व्यवहार
68
8. पद एवं पदातीत
70
9. दर्शन-दृश्य-दृष्टि
78
10. क्लेश मुक्ति
84
11. योग
87
12. लक्षण, लोक, आलोक एवं लक्ष्य
95
13. मानवीयता
99
14. मानव व्यवहार सहज नियम
113
15. मानव सहज न्याय
124
16. पोषण एवं शोषण
132
(i) मानव धर्म नीति
Subsection
143
(ii) मानव राज्य-नीति
152
17. रहस्य मुक्ति
169
18. सुख, शांति, संतोष और आनन्द