जीवन सहज 122 क्रियाओं की परिभाषा
आत्मा सहज दो क्रियाएँ - अनुभव व प्रामाणिकता रूपी दो क्रियाकलाप ।
अस्तित्व सहज परमानंद सहज
अनुभव प्रामाणिकता
अस्तित्व :- सत्ता में संपृक्त प्रकृति के रूप में नित्य वर्तमान ।
परमानंद :- अनुभव संपन्न अभिव्यक्ति, संप्रेषणा, प्रकाशन ।
बुद्धि सहज चार क्रियाएँ :- बोध एवं संकल्प रूपी चार क्रियाकलाप ।
आनन्द :- अंतविहीन (बिना रूकावट) उत्सव क्रि या, नित्य उत्सव क्रिया ।
धी :- उत्सवशीलता का प्रवर्तन क्रिया (परावर्तन के लिए तत्परता) ।
जागृति सहज स्थिति और गति की स्वीकृति क्रिया परमता ही आनंद और धी है ।
अस्तित्व :- स्थिति, गति, विकास, जागृति और वर्तमान सहज निर्भ्रम स्वीकृति-
1. जानना, मानना, स्वीकार करना
2. सहअस्तित्व ।
धृति :- सहअस्तित्व सहज सत्य में निष्ठा और परावर्तित करने केलिए प्रवृति ।
सत्य बोध सहज परावर्तन में निष्ठा ।
भय का अभाव वर्तमान में विश्वास ही धृति है ।