चित्त सहज सोलह क्रियाएँ :-
चिंतन व चित्रण रूपी सोलह क्रिया कलाप :-
श्रुति, स्मृति
श्रुति :- यथार्थ समझदारी का भाषाकरण ।
यथार्थ जीवन व दर्शन पूर्ण अभिव्यक्ति ।
सहअस्तित्व सहज यथार्थों का भाषा सहज संप्रेषणा, अभिव्यक्ति।
स्मृति :- बार-बार आवश्यकतानुसार भाषा पूर्वक समझ का प्रस्तुतीकरण ।
भाषा से इंगित वस्तु को साक्षात्कार सहित चित्रण समेत की गई स्वीकृति, जिसको बार-बार दोहराया जाना प्रमाण है ।
मेधा, कला
मेधा :- स्मृति का धारक-वाहक क्रिया ।
कला को साक्षात्कार करने वाली चिंतन क्रिया ।
उपयोगिता एवं कला की संयुक्त उपलब्धि (प्रकाशन) एवं योग्यता मेधा अपने में, जीवन क्रियाओं में, से विज्ञान व विवेक सम्मत साक्षात्कार सहित स्वीकार क्रिया है ।
कला :- उपयोगिता योग्य सुंदर क्रिया ।
कान्ति, रूप
कान्ति :- कान्ति का तात्पर्य प्रकाश से है । सार्थकता संभावना के अर्थ में स्पष्ट होना प्रकाश है ।
रूप :- आकार, आयतन, धन ।
निरीक्षण, गुण
निरीक्षण :- अनुभव मूलक दर्शन व उसके प्रकटन की संयुक्त चिंतन चित्रण क्रिया ।
गुण :- सापेक्ष गतियाँ ।