• ⁘ इच्छा :- वांछित एवं इप्सित के प्रति सजगता ।
  • ⁘ विद्या :- जो जैसा है, उसको वैसा ही स्वीकार करना ।
  • ⁘ प्रज्ञा :- यथार्थ की पूर्ण अनुमान सहित पूर्ण स्वीकृति क्रिया ।
  • ⁘ कीर्ति :- विकास की ओर सक्रियता ।
  • ⁘ विचार :- स्फुरण पूर्वक सत्यता को उद्घाटित करने हेतु की गई क्रिया ।
  • ⁘ निश्चय :- सत्यतापूर्ण विचार की निरंतरता ।
  • ⁘ धैर्य :- न्यायपूर्ण विचार की निरंतरता ।
  • ⁘ शांति :- समाधान पूर्ण विचार व्यवहार में गतित होना ।
  • ⁘ दया :- दूसरे के विकास में हस्तक्षेप न करना, सहायक होना ।
  • ⁘ दम :- ह्रास की ओर जो आसक्ति है, उसकी समापन क्रिया । उत्थान की ओर प्रवृत्त।
  • ⁘ कृपा :- दूसरे मानव के जागृति के लिये सहायता अथवा पात्रता अर्जित करने में सहायक होना ।
  • ⁘ करुणा :- जागृति के लिए उत्प्रेरित करना अथवा जागृति के लिए योग्यता और पात्रता अर्जित करने में सहायक होना ।
  • ⁘ उत्साह :- जागृति के लिये प्रवृत्ति, उत्सव, सजगता ।
  • ⁘ कल्पना :- मान्यता का पूर्व रूप ।
  • ⁘ भाव :- मूल्य, मूल्यांकन ।
  • ⁘ श्रद्धा :- श्रेय की ओर गतिशीलता ।
  • ⁘ क्षमा :- जागृति के लिए की जाने वाली सहायता के समय उसके ह्रास पक्ष से अप्रभावित रहना ।
  • ⁘ अनुराग :- निर्भ्रम ज्ञान की निरंतरता में अनन्यता ।
  • ⁘ जाति :- रूप, गुण, स्वभाव व धर्म की विशिष्टता एवं भौतिकता ।
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