- ⁘ अक्षमता :- इच्छानुसार बौद्धिक एवं कार्य-व्यवहार क्रिया का संपादन न कर पाना ही अक्षमता है । अक्षमता का कारण अजागृति और रोग है ।
- ⁘ हीनता :- विश्वासघात ही हीनता है ।
- ⁘ विश्वासघात :- जिससे जिस क्रिया की अपेक्षा है, उसके विपरीत आचरण किया जाना ही विश्वासघात है ।
- ⁘ छल :- विश्वासघात के अनन्तर भी उसका भास या प्रकट न हो ऐसे विश्वासघात की छल संज्ञा है ।
- ⁘ कपट :- विश्वासघात के अनन्तर उसके प्रकट या स्पष्ट हो जाने की स्थिति में विश्वासघात की कपट संज्ञा है ।
- ⁘ दम्भ :- आश्वासन देने के पश्चात् भी किए गये विश्वासघात की दम्भ संज्ञा है ।
- ⁘ पाखण्ड :- दिखावा पूर्वक किए गए विश्वासघात की पाखण्ड संज्ञा है ।
- ⁘ क्रूरता :- स्व-अस्तित्व को बनाए रखने के लिए बलपूर्वक दूसरे के अस्तित्व को मिटाने में जो वैचारिक प्रयुक्ति तथा शोषण कार्य है, उसे क्रूरता कहते हैं ।
- # अपराध एवं प्रतिकार क्रूरता के दो भेद हैं ।
- # अपराध :- परधन, परनारी/परपुरुष, परपीड़ात्मक कार्य व्यवहार ही अपराध है ।
- # अपराधात्मक क्रूरता हिंसा के रूप में व्यक्त तथा प्रतिकारात्मक क्रूरता प्रतिहिंसा के रूप में व्यक्त है ।
- ● मानवीय स्वभाव, विषय एवम् दृष्टि को संरक्षण, संवर्धन एवम् प्रोत्साहन देने वाली व्यवस्था मानवीय व्यवस्था है ।
- ⁘ मानवीय स्वभाव :- धीरता, वीरता और उदारता ही मानवीय स्वभाव है ।
- ⁘ मानवीय विषय :- पुत्रेषणा, वित्तेषणा एवं लोकेषणा मानवीय विषय है ।
- ⁘ मानवीय दृष्टि :- न्यायान्याय, धर्माधर्म एवं सत्यासत्य मानवीय दृष्टि है ।
Table of contents
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-20
मानव व्यवहार दर्शन
-19
विकल्प
-14
मध्यस्थ दर्शन के मूल तत्व
-8
लेखकीय
-6
संदेश
-4
मध्यस्थ दर्शन में प्रतिपादित मूल बिन्दु
-2
कृतज्ञता
1
1. सहअस्तित्व
4
2. कृतज्ञता
6
3. सृष्टि-दर्शन
17
4. मानव सहज प्रयोजन
47
5. निर्भ्रमता ही विश्राम
60
6. कर्म एवं फल
62
7. मानवीय व्यवहार
68
8. पद एवं पदातीत
70
9. दर्शन-दृश्य-दृष्टि
78
10. क्लेश मुक्ति
84
11. योग
87
12. लक्षण, लोक, आलोक एवं लक्ष्य
95
13. मानवीयता
99
14. मानव व्यवहार सहज नियम
113
15. मानव सहज न्याय
124
16. पोषण एवं शोषण
132
(i) मानव धर्म नीति
Subsection
143
(ii) मानव राज्य-नीति
152
17. रहस्य मुक्ति
169
18. सुख, शांति, संतोष और आनन्द