- ● स्वयं स्फूर्त जीवन मानवीयता का द्योतक है, जो एक स्वतंत्र जीवन है ।
- ● सहअस्तित्व ही विरोधों से मुक्ति, विरोधों से मुक्ति ही विरोध का शमन है और विरोध का शमन ही सहअस्तित्व है ।
- ● अज्ञान, मृत्यु, अंधकार और भ्रम यह चार प्रकार की मान्यताएँ मानव विचार में पाई जाती है । इन्हें माना जाता है अवश्य, पर इनका अस्तित्व सिद्ध नहीं होता ।
- ● मृत्यु, अंधकार और भ्रम के मूल कारण में भी अज्ञान ही है ।
- ● जो जैसा है, उसको वैसा ही समझने योग्य विकासांश का अभाव ही अज्ञान, पिण्ड की विघटन क्रिया को मृत्यु, किसी इकाई के एक ओर प्रकाश पड़ने पर उसके दूसरी ओर जो उसकी छाया पड़ती है उसी को अंधकार संज्ञा है ।
- ● अगोपनीयता एवं रहस्यहीनता ही यथार्थता है, जिससे ही सहजता की उपलब्धि है ।
- ● गोपनीयता से संकीर्णता का तथा रहस्यता से भ्रामकता का प्रसव है ।
- ● अज्ञान, मृत्यु, अंधकार एवं भय के वैकल्पिक रूप एवं गुण की कल्पना ही ‘भ्रम’ है ।
- ● संकीर्णता तथा रहस्यता से मानव ह्रास की ओर गतिमान है, जिसके कारण विरोध, विद्रोह, आतंक आदि सभी अमानवीय गुण प्रभावी हैं ।
- ● समष्टि (संपूर्ण मानव) के बल, बुद्धि, रूप, पद एवं धन से व्यष्टि का बल, बुद्धि, रूप, पद एवं धन अल्प है, क्योंकि समष्टि की आंशिकता की व्यष्टि संज्ञा है ।
- ● मानव इकाई अभिमान ग्रस्त होने पर वंचना, परिवंचना, आतंक एवं विग्रह पूर्वक अनेक के शोषण में प्रवृत्त होती है । साथ ही, उस अभिमान से मुक्त होकर ही विवेक, विज्ञान, स्नेह, सहजता व सहअस्तित्व पूर्वक एक द्वारा अनेक के पोषण की प्रवृत्ति पाई जाती है तथा पोषण भी होता है ।
- ● शोषणवादी प्रणाली में संघर्ष तथा पोषणवादी प्रणाली में शांति की उपलब्धि है ।
- ● व्यवहारिक एकसूत्रता तथा वैचारिक एकसूत्रता ही पोषणवादी प्रणाली का मूल सूत्र है । अन्याय में शोषण है ही ।
Table of contents
Jump to any page
-20
मानव व्यवहार दर्शन
-19
विकल्प
-14
मध्यस्थ दर्शन के मूल तत्व
-8
लेखकीय
-6
संदेश
-4
मध्यस्थ दर्शन में प्रतिपादित मूल बिन्दु
-2
कृतज्ञता
1
1. सहअस्तित्व
4
2. कृतज्ञता
6
3. सृष्टि-दर्शन
17
4. मानव सहज प्रयोजन
47
5. निर्भ्रमता ही विश्राम
60
6. कर्म एवं फल
62
7. मानवीय व्यवहार
68
8. पद एवं पदातीत
70
9. दर्शन-दृश्य-दृष्टि
78
10. क्लेश मुक्ति
84
11. योग
87
12. लक्षण, लोक, आलोक एवं लक्ष्य
95
13. मानवीयता
99
14. मानव व्यवहार सहज नियम
113
15. मानव सहज न्याय
124
16. पोषण एवं शोषण
132
(i) मानव धर्म नीति
Subsection
143
(ii) मानव राज्य-नीति
152
17. रहस्य मुक्ति
169
18. सुख, शांति, संतोष और आनन्द