उत्तर : इकाई अपने गति सहित शून्याकर्षण में स्थित हो जाता है, पहुँच जाए, रह जाए, हो जाए, 3 phrase है इसका। ये 3 phrase में शून्याकर्षण में रहता है वस्तु, उसका गति उस समय में जैसा रहता है, उसी गति उसका निरंतरता को प्राप्त करता है। उस गति के लिए ईंधन की जरूरत नहीं है। इकाई + गति + शून्याकर्षण सिद्धान्त से होता है। अभी वो कैसा घटित हो रहा है? जैसा जितने भी अभी satellites भेजे हैं, यहाँ से भेजते समय में आप ईंधन देते हो, उसमें एक गति भी बनाए रखते हो, उस गति से शून्याकर्षण में जा करके पदस्थ हो जाता है। वो गति की निरंतरता बन जाती है, कोई ईंधन की व्यय उसमें होता नहीं, गति के लिए। अब रह गया, आपका आदान-प्रदान के लिए जो चाहिए था ईंधन वो सूर्य से मिलता रहता है। इस ढ़ंग से व्यवस्था है। सूर्य से मिलने वाला ईंधन है, उष्मा है, वो शून्याकर्षण में रहने वाले हर वस्तु को मिलता ही रहता है, उसी प्रकार ये धरती को भी मिल रहा है। धरती स्वयं में बहुत बड़ा satellite है, एक बहुत बड़ा आकाशयान है और बहुत बड़ी भारी aeroplane है। ये इसमें 700 करोड़ आदमी को बता रहे हैं, अभी 600 करोड़ आदमी को बता रहें हैं और आगे चल करके और भी थोड़ा सा ज़्यादा हो गया तो आश्चर्य नहीं है, ऐसे यान में आप हम सब अवस्थित हैं। जब हम अपने पर विश्वास नहीं रखते हैं, इसीलिए हम जहाँ रहते हैं, उस पर विश्वास नहीं रखते हैं।
इकाई ऊर्जा सम्पन्न, बल सम्पन्न, चुम्बकीय बल सम्पन्न। चुम्बकीय बल सम्पन्नता का क्या मतलब? रचना के रूप में चुम्बकीय बल सम्पन्नता का प्रतिष्ठा अपने आप में वैभवित है। आप छोटे से वस्तु लो वो भी एक रचना, बड़े से बड़े वस्तु ले लो तो भी एक रचना है। उसके लिए मिसाल दिया ये धरती बड़े से बड़े रचना है, इसको आप भी सहमत हैं, हम भी सहमत हैं, आप हम सब सहमत हैं। बड़े से बड़े रचना में जितने भी छोटे रचना रहते हैं, बड़े रचना के अपेक्षा में ये अपने भार को व्यक्त करते हैं। आपके समक्ष हम कितना भार हैं, इसको प्रस्तुत करते हैं। क्या बात है! उसको हम तोलते हैं।
प्रश्न : धरती पर जो भार नापने का तराजू है, उसका reference धरती है?
उत्तर : धरती है, उसका आधार धरती है। ठीक हो गए, और जब भार प्रदर्शन का मापदण्ड की बात आती है, मापदण्ड बनाने वाला आदमी, आदमी के बिना मापदण्ड कोई नहीं बनाता। आप मापदण्ड नहीं भी बनाइयें, भार प्रदर्शन रहता ही है।
प्रश्न : ये जो भार प्रदर्शन है, ये हर इकाई अपने जैसे इकाईयों के तरफ आकर्षित हो रही है, इकाई का परस्परता में भार को कैसे व्यक्त करते हैं?
उत्तर : भार प्रदर्शन, एक बड़े इकाई के साथ रहने वाले जितने भी छोटी इकाइयाँ हैं, भौतिक रासायनिक इकाइयाँ, वो अपना भार प्रदर्शन किए रहते हैं। ये बड़े चीज़ के साथ होने वाली सम्मान का प्रदर्शन है। उसका सूत्र है, ठोस, ठोस के साथ, विरल, विरल के साथ, तरल, तरल के साथ सहअस्तित्व में होना अपना वैभव स्वीकारा है। इसको सम्मान हम शब्द देते हैं, आपको क्या तकलीफ है? हमारा जो सारा शब्द विनियोजन ऐसा है, मनुष्य जो है ना अपने में विश्वास के प्रति विश्वास हासिल करें। ये अस्तित्व में हर जगह विश्वास व्यवस्था में ही है। इस पर विश्वास करें। सुख पूर्वक जिए। ये हमारा उद्देश्य है, ये उद्देश्य के अर्थ में हम सबको नाम दे रखा है। अब तो सराहना करो, करो।