7. प्रकाश एवं ताप
👉 विडिओ संदर्भ देखें: video 13, time 01:54-36:22
प्रश्न : प्रकाश क्या चीज़ है?
उत्तर : प्रकाश जो बात है, इतना साधारण बुद्धि से बनेगा नहीं, थोड़ा ज़्यादा बुद्धि लगाना पड़ेगा! प्रत्येक वस्तु प्रकाशमान है। हर वस्तु प्रकाशमान है, एक परमाणु अंश से परमाणु, परमाणु से अणु, अणु से अणु रचित पिण्ड, हर प्राणकोषाएँ, प्राणकोषा से रचित हर रचना प्रकाशमान है। इतना ही नहीं है, व्यापक वस्तु भी नित्य वर्तमान है। प्रकाशमान है एक एक वस्तु और व्यापक वस्तु वर्तमान है। व्यापक वस्तु नित्य वर्तमान है, एक एक वस्तु नित्य प्रकाशमान है। पहचान प्रस्तुत करता रहता है अपना।
प्रश्न : क्या व्यापक अपना पहचान प्रस्तुत नहीं करता ?
उत्तर : करता है ना, वर्तमान पहचान नहीं है, तो क्या है? प्रकाशमानता सीमायें हैं, व्यापकता वर्तमान है। हर एक वस्तु वर्तमान भी है और प्रकाशमान भी है, अपने अलग पहचान को प्रस्तुत करता है। तो इस ढंग से काम है। इस वर्तमानता और प्रकाशमानता का मूल में विज्ञान उस जगह को टटोल पाया, नहीं टटोल पाया, हम नहीं जानते हैं। मूल तत्व है, व्यापक वस्तु में एक एक वस्तु सम्पृक्त रहना, सम्पृक्त रहने का फलस्वरूप ही है इनमें ऊर्जा सम्पन्नता, बल सम्पन्नता बना रहना। ऊर्जा सम्पन्नता, बल सम्पन्नता बने रहने का प्रमाण ही है क्रियाशीलता। क्रियाशीलता का व्याख्या ही है श्रम, गति, परिणाम। ये श्रम गति परिणाम के साथ इन पाँचों शक्तियों का पाँचों पहचान, जैसा कि ध्वनि, ताप, चुम्बकीयता, भार, विद्युत का पहचान मनुष्य को है। इन पाँचों प्रकार की पहचान एक ही परमाणु में होता है, हर परमाणु में होता है। इसीलिए हर वस्तु, इस अस्तित्व में जितने भी वस्तु आपको दिखता है बड़ा-छोटा, सभी का सभी परमाणु का ही रचना है, मूलतः।
इन सभी पाँचों चीज़ होने के आधार पर वो एक दूसरे को पहचानता भी है, स्वयं का पहचान दूसरा करते भी हैं। इसमें अपने को तकलीफ कहाँ से आयी है? मनुष्य अपना पहचान को निर्धारित नहीं कर पाया। इसी आधार पर सारे तकलीफ germinated है। प्रकाशमानता = प्रकाश, एक सूत्र आ गए। प्रकाशमानता ही प्रकाश है। ज्यादा प्रकाश, कम प्रकाश, इसको कैसे पहचानोगे? जितना ज्यादा तप्त रहता है, उसका प्रतिबिम्बित ज्यादा प्रकाश कहलाता है। तप्त परम स्थिति में सूर्य है। सूर्य का प्रतिबिम्बित ज्यादा प्रकाश है, किसी के ऊपर प्रतिबिम्बित होता है, वो ज्यादा प्रकाश सा दिखता है। प्रकाशित रहता है ये एक बात है, सूर्य अपने जगह में प्रकाशित है। हम यहाँ धरती पर प्रकाशित हैं, सूर्य का प्रतिबिम्ब पड़ने से हमारा प्रकाशमानता का अर्थ दिन चौगुनी, रात चौगुनी कर देता है। हमारा प्रकाशमानता का एक को दस, दस को हज़ार, हज़ार को करोड़ भाग बढ़ा देता है। परस्पर पहचान के लिए ये बनता है।
उसके बाद और एक अड़चन आ गई - गुग्गु का आँख। गुग्गु का आँख में क्या होता है? दिन में अंधा हो जाता है, दिखता नहीं है। light phobia, जो आदमी को light phobia होता है, जानते हो? ज्यादा प्रकाश होने से आँखें