उत्तर : आप दो ही मानतें हो तो उसमें भी कोई जड़ नहीं चले जाता, जड़ उतना ही है। अभी जो शब्द का प्रयोग करते हैं, उसका अर्थ संगत विधि से हमने प्रस्तुत किया, वो वस्तु के रूप में कैसा, क्रिया के रूप में कैसा, आचरण के रूप में कैसा काम करता है, उसकी ओर हमारा दृष्टिपात है। उस विधि से हमने बता दिया। अच्छा आपका मानने में हम कोई हस्तक्षेप करने वाले नहीं हैं, आप कुछ भी मान लीजिए। आप पूछेगें जिस शब्द के आधार पर वस्तु को, उसको हम इंगित कराएगें।
भारबंधन से अणुबंधन : भार होने के आधार पर ही अणुबंधन में आता है, हर एक परमाणु। परमाणु में भार रहता है, वो भार एक प्रकार से परमाणुओं को बांधने का काम किया रहता है। वो एक अनुबंधित करके रखता है। इसको बनाए रखना है, इतने भार को, इसका नाम है भार बंधन। तभी मध्य में जखीरा बनता है, भार के लिए। उसको बनाए रखना है, आश्रित परमाणु, जो चारों तरफ घूमते हैं, उनका भी उस में भागीदारी है। बीच में काम करते रहते हैं, उनका भी भागीदारी हैं। इन पूरे परमाणु का भागीदारी है, वो भार को बनाए रखना। परमाणु गठन होने का नाम ही है भारबंधन। ऐसा, बस खतम हो गयी बात।
प्रश्न : भारबंधन को फिर से परिभाषित करना चाहिए क्योंकि इससे पहले जो आशय जा रहा था, जब हम किसी वस्तु को रोक रहे हैं, उसको अपनी जो स्थिति बनने वाली थी उससे, जैसे ठोस पदार्थ को धरती में पहुँचने से रोक रहे हैं, उस समय जो आपको बल लगाना पड़ा, उसको भार कहा गया। जो आप अभी भार कह रहे हैं, उसको ठीक से परिभाषित होना चाहिए।
उत्तर : दोनों में result एक ही मिलता है, इसको थोड़ा ध्यान से समझाने की बात है। अभी अपन परमाणु की बात कर रहे हैं, पिंड की बात नहीं कर रहे हैं। पिंड की क्रियाकलापों को हम जितना आसानी से समझ पाते हैं, उतना आसानी से परमाणुओं के क्रियाकलापों को समझने के लिए थोड़ा सा और ज़्यादा महीन बुद्धि लगाना पड़ेगा, ऐसा मुझको लगता है। परमाणु में तो अपन मान लिए हैं, आप हम सब ये समझे हैं, मध्य में अंश होता है, उसके चारों तरफ चक्कर लगाने वाले अंश होते हैं। अब ये भी हम माने हैं, चक्कर लगाने वाले हैं, उनमें कोई भार होता नहीं। अब भार का बात कहाँ है पूछा? मध्य में जो जकीरा बना रहता है, यही भार का द्रव्य है। बंधन कैसा हो गया पूछा? इन भार को बनाए रखने के लिए सारा चक्कर लगाए रहते हैं।
ये चक्री घूमता है काय के लिए पूछा? ये भार को बनाए रखो। परमाणु के अर्थ में यही भार बंधन हैं, भार के साथ ये सभी परिवेष में घूमने वाले अंश हैं, वो सब अनुबंधित रहते हैं। इसको बनाए रखना। जब कभी ये बनाए रखने में कमज़ोरी करते हैं, बीच वाला पुनः बनाए रखने के लिए training देता है। इतनी तो बात है, छोटी सी बात! इतनी तो कथा है, इस कथा के अनुसार परमाणु में भार बंधन होता है, अपन स्वीकार सकते हैं। एक तो ये बात हुई।
उसके बाद अणु बंधन की बात आती है। ऐसे भार बंधन से सम्पन्न परमाणुऐं एक जगह में होते हैं, उसको अणु बंधन कहते हैं, अणुबंधन का मतलब क्या है? यह भार सब एकत्रित हो गये, 1, 2, 3, 4, दस हजार, करोड़, अरब परमाणुओं का भार एक जगह में हो गया, उसका नाम है अणुबंधन। अणुबंधन में भार बंधन जो थी, उसको पहचानने के लिए हम भौतिक तुला को बनाना, इतना आसान नहीं। वो गणित से ही उसके भार को लाना पड़ेगा, मेरे अनुसार। कोई ना कोई cube square में कितने परमाणु हो सकते हैं? पहले वो measurement, कितना अंश के परमाणु