13. ज्वार भाटा और विद्युत
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धरती और सूर्य का सम्मुखता, इसकी जो प्रकार, ये कैसे धरती के सामने घूम रहा है? ये धरती के सामने घूमने की जो तरीका है धरती का, ये ऐसा घूमता है, ऐसा सोया हुआ सूर्य के सामने रहता है सदा। ये जिस ओर सरकता है, उसको हम उत्तर कहते हैं।
प्रश्न : जो वर्तुल गति अपन धरती का देखेंगे तो वर्तुल गति का जो direction है, वो north direction है।
उत्तर : पूरा सूर्य के चारों तरफ ऐसा चलता है, जबकि सूर्य के इस ओर आने से भी आगे सरकता है, उसी को उत्तर कह रहे हैं हम, उसके आगे सरक करके यहाँ आता है तभी भी आगे सरकने वाले विधा को हम उत्तर कह रहे हैं, ऐसा बना हुआ है।
प्रश्न : उत्तर और दक्षिण तो धरती पर रहने वाले लोगों के लिए है, ये सत्ता के लिए उत्तर दक्षिण नहीं है, पूर्व और पश्चिम भी हम बोलते हैं सूरज के सापेक्ष और उत्तर और दक्षिण जब बोलते हैं, अभी हम ध्रुव तारा के सापेक्ष बोलते हैं। लेकिन यदि हम गति के रूप में देखेगें, वर्तुल गति में, तो बाबाजी ये समझा रहे हैं कि पृथ्वी का जो गति, जिस दिशा में वर्तुल गति बन रही है उस दिशा को हम north pole कह रहे हैं।
उत्तर : बस ऐसा बनी रहती है। ये चलते-चलते इसका निश्चित सरकने की विधि है, सरकने को भी वर्तुलात्मक गति कहते हैं। वो सरकता हुआ स्थिति में क्या होता है, सिर को ऐसा वैसा करना होता है। ऐसा करने पर क्या होगा, इस ओर दौड़ेगा समुद्र, वैसा कर दिया तो नीचे दौड़ेगा, बस इतना ही बात है। वो कम्पनात्मक गति वश ही ज्वार भाटा है।
प्रश्न : मतलब धरती में कम्पनात्मक गति होती है, इसके कारण ठोस तो हट जाता है, पानी तरल होने के कारण थोड़े देर में हटता है, और हवा और देर में हटती है।
उत्तर : इस ढंग से ज्वार भाटा, उसको अभी बच्चों को ये पढ़ाना चाहते हैं, चन्द्रमा ऊपर खींचता है पानी को।
प्रश्न : वैज्ञानिक लोग बोलते हैं कि चन्द्रमा खींचता है। चंद्रमा और पृथ्वी दोनों अलग-अलग शून्याकर्षण में हैं।
उत्तर : शून्याकर्षण में रहना कहाँ पहचाने हैं?
प्रश्न : वैज्ञानिक लोग बोलते हैं कि दोनों का आकर्षण बल से होता है।
उत्तर : हाँ वोही खींचातानी में हैं, एक को दूसरा खींचता है, ऐसा उनका सोचना है। अपन क्या कहते हैं, दोनों शून्याकर्षण में हैं, दोनों स्वतंत्र अपने ढंग से काम कर रहे हैं, अपने गति से रह रहे हैं, हो रहे हैं, विकसित हो रहे हैं ऐसा हम कह रहे हैं। ये ठीक है, वो ठीक है सोच लो।