में कितना भार, एक square foot को तोलने पर जितना आता है, उतने संख्या में बाँट देना, इस गणित से हम एक तालिका बना सकते हैं। उसके लिए भौतिक तुला बना करके तोल दो कहोगे, परमाणु तोलने में नहीं आएगा। अणु और अणु रचित कोई ना कोई पिंड तोलने में मिलेगा। व्यवहार में जो हमको मिलता है, वो परमाणु के बाद की कई अवस्था को नाकने के बाद ही हमको व्यवहृत होने के लिए वस्तु मिलता है, ये बात को हम विश्वास करना चाहिए और होता इतना ही है। से अणु बंधन से भार बंधन का अनुमान होता है। वास्तविकता में होता क्या है? वो भार बंधन से ही अणु बंधन प्रमाणित रहता है। ये बात सच्चाई है। रहता ऐसा है, हम गणना ऐसा करते हैं, ऐसा सोचना चाहिए। ये साधारण है शायद। इसमें कोई ख़ास प्रतिकूलता भी हमको नहीं दिखता है। होने को हम आपके पैर से सिर तक नाप लिया,या सिर से पैर तक नाप लिया, तो क्या बुरा हुआ? दोनों में से हमको एक ही मिल रहा है result।
प्रश्न : एक-एक परमाणु में भार बंधन, उसके कारण अणुबंधन है परस्पर्ता में, उसके कारण पिंड बनता है। अगर हमको भार बंधन को नापना है, हम पूरे भार को नाप लेंगे। उस पिंड में कितने परमाणु है, उसका संख्या का अनुमान लगाएगें। उसके आधार पर भारबंधन को नाप लेंगें।एक तो ये क्रम, दूसरा जो भार का concept अभी देखते हैं, वो यह है, कि 2 परमाणु या अणु या अणु रचनाएँ आपस में मिलकर एक गठन बना रहे हैं। उस गठन की एक निश्चित दूरी है। उस दूरी को आप बनने से रोकते हैं, उस समय जो बल आपको लगाना पड़ता है, उसको भार के रूप में परिभाषित किया जाता है।
उत्तर : ठीक है, ये तो तराजू की बात में आ गया। ये बहुत जो है ना, ऊपर आकर के बहुत स्थूल रूप में इसको हम ऐसा पहचानते हैं। सूक्ष्म रूप में, गणितीय रूप में पहचानते हैं। Actual अस्तित्व में होता है, उसको भार बंधन को परमाणु में पहचानते हैं।
प्रश्न : व्यवहार क्रम में जो भार है, वो second वाला है, तात्विक क्रम में जो भार है, वो भार बंधन है।
उत्तर : यही बनता है, यदि सद्बुद्धि से सोचा जाए। Root पूरा इसी में हो पाता है। अणु रचना में भी ताना-बाना बनता होगा। एक दूसरे परमाणुऐं जुड़ने की प्रक्रिया को आप कोई नाम देते हैं। ठीक है वो, दीजिए ना। अणु रचना होता ही है, ये बात सही है। अणु से रचित रचनाएँ होते हैं, ये बात सही है। इसके बारे में क्या तकलीफ़ है?
भार को हम पहचानने की विधि यही हैं, जैसे एक परमाणु का भार को पहचानने के लिये, परमाणु को कोई भौतिक तुला से तोला नहीं जा सकता। वो गणितीय विधि से ही होगी। उसमें ये ही युक्ति है, कोई भी एक छोटे से cube, उसमें से कितने परमाणु हो सकता है, उसको गणितीय गणना। उतने भाग में उतने cube की तोल को बाँट लेना, ये ही तो परमाणुओं का तोल है।और कौन सा तोल निकलोगे? ये ही तोल निकलोगे। गणितीय विधि से वहाँ निकाला। यहाँ तराज़ू से तोल करके हम तोल निकाल लिया। परमाणु का जो तोल है, वो ही उसका भार है।
भार बंधन के बारे में आपको समझाया ना, पूरा परमाणु में जितने भी अंश हैं, उसको संरक्षित करके रखे हैं। भार बंधन का मतलब वो पूरा परमाणु का उद्देश्य उसको बनाए रखना। इसका नाम है भार बंधन। वो भार के रूप में हमको गणित से मिलता है। उसके बाद धरती से पुनः आता है, जैसे हर वस्तु ठोस-ठोस के साथ, विरल-विरल के साथ, तरल-तरल के साथ, सहअस्तित्व में होना रहता है, उसको बीच में रोकिये, उसका भार निकलता है, ये आ गई। वो ही