14. ज्वारभाटा और पूर्णिमा का प्रभाव

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प्रश्न : अभी तक मान्यता है कि ज्वार भाटा चन्द्रमा के आकर्षण के कारण होता है, और ये भी एक मान्यता है कि पूर्णिमा और अमावास्या के दिन ज्वार भाटा बहुत ज्यादा होता है, और तीसरी बात है, पूर्णिमा और अमावास्या के दिन बहुत सारे लोगों में पागलपन का दौरा भी पड़ता है, बहुत सारे लोगों को जो ज्ञान हुआ है, ऐसा माना जाता है, कि पूर्णिमा और अमावास्या के दिन ही होता है। उसका प्रभाव जीवन पर पड़ता है, ऐसा निष्कर्ष निकल रहा है। तो इसके बारे में?

उत्तर : शरीर को जीवन मानते है, तो फर्क पड़ता ही है, एक तो बात उसी में पूरा हो जाता है। जो कुछ भी असर है, ये जितने भी भौतिक रासायनिक प्रक्रिया से, तो शरीर तक ही उसका असर है। यदि जागृत जीवन होता है, यदि शरीर बेकार होता है, तो भी कोई फर्क नहीं, कार हो गया तो भी फर्क नहीं। जागृत नहीं है, शरीर के विकार के साथ जीवन भी विकृत हो जाता है, विकृती की पीड़ा को भोगता है, यही देखा गया है।

ज्वार भाटा के बारे में पहले हो चुका है, ये धरती की चाल के आधार पर, धरती की कंपन के आधार पर, ज्वार भाटा होता है। और जो बात आप कहते हैं रोग की बारे में जो ज्ञान की बारे में, हर दिन ही ज्ञान हुआ है, किसी ना किसी को, हर दिन ही कोई ना कोई पागल हुए हैं, हर दिन ही कोई ना कोई पागल आदमी अच्छा भी हुआ है, कोई ना कोई आदमी जो अच्छा आदमी मानते रहे वो कोई ना कोई भद्द काम किया ही हर दिन, हर तिथि में। अब किसको हम पकड़ के रोवें भाई!

प्रश्न : पूरा विश्व का जो survey है ना उसमें सबसे ज्यादा पागल पूर्णिमा तिथि के आस पास एक दो दिन के अंतर्गत हुए हैं, क्योंकि पहले हम लोग जो मानते थे कि पानी को आकर्षित करता है चन्द्रमा, और वैसे ही 80% पानी आदमी के शरीर में है, यहाँ तक की जो दिमाग में grey matter है वो भी तरल है, तो चन्द्रमा का प्रभाव उसके ऊपर भी पड़ता है। “चंद्रमा मनसो जातः” मंत्र शास्त्र ज्ञान भी है और विज्ञानिक, ऐसा मान्यता है। तो उसके तहत बहुत जोर से जो उद्वेलन होता है उसको जो बर्दस्त नहीं कर सका वो पागल हो जाता है। अच्छा world survey ग्रुप में परिणाम भी ऐसा आया है, कोई ना कोई दिन पागल होते हैं ऐसा मत बोलिए, इस particular point के ऊपर बोलिए।

उत्तर : वो ही बात करें, एक तो generalize किया इसको, particular आप जो कह रहे हैं उसी को मान लेते हैं।

प्रश्न : और सबसे ज्यादा ज्ञान भी जो अभी record मिलता है, सबसे ज्यादा ज्ञान भी पूर्णिमा तिथि और अमावस्या तिथि के आस पास लोगों को हुआ है।

उत्तर : अच्छा, होगा, होगा ऐसा मान लेते हैं हम, हमको इसमे कोई तकलीफ नहीं है, मानिये जैसा कोई जगह में ज्यादा accident हो गया ये भी कहते हैं, कोई जगह में नदी में, इसी जगह में ज्यादा लोग डूबे, ये भी कहते हैं, कोई

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