19. गाय का दूध और यांत्रिक शक्ति
👉 विडिओ संदर्भ देखें: video 16, time 00:00-01:21
प्रश्न : मनुष्य गायों का दूध पीता है, तो इसमें कभी-कभी वो सुई लगा के ज्यादा दूध बढ़ाता है।
उत्तर : वो गलत है, वो गलत हो गया।
प्रश्न : और दूसरा वैसे भी गाय दुह लेते हैं, तो क्या वो गाय का शोषण करते है। मनुष्य जो दूध पीता है गाय का, गाय का शोषण करता है क्या?
उत्तर : वो बात को हमको अच्छी तरीके से समझने की बात है, अभी हम लोग जो समझते हैं, मैं स्वयं, गाय को हम जितना सेवा करते हैं, उसके प्रतिफलन में हम दूध पाते हैं, उससे ज्यादा मिलता नहीं। एक दूसरे तरफ से मानव संवेदना के साथ सोचने पर, गाय में जो दूध होता है, गाय की बच्चे के लिए होता है, ठीक है, तो हम जितना ज्यादा खुशामद करते हैं, उतना ज्यादा दूध होता है, तो यदि वो सारे दूध पीला दें बच्चे को, बच्चे मर जाते हैं। ठीक है। तो ये दोनो घटनाओं को देखा गया है। ये भी नहीं है, कि ये देखे नहीं हैं, ये सब हमारा देखी हुई बात है ये। उस स्थिति में हम क्या निर्णय लें? निर्णय लेने का यही निकलता है, हम जितना खुशामद करते हैं, उतना दूध लो, गाय की बच्चे का proportion बराबर बच्चे को ही दिया जाए, यही निर्णय लेना है। बच्चे मर गये उसके बाद जो दूध लेने वाली कार्यक्रम गलत।
👉 विडिओ संदर्भ देखें: video 16, time 01:21-06:06
प्रश्न : टिकाऊ खेती की बात को ध्यान में रखते हुए tractor का उपयोग आज जिस तरह से अनिवार्य हो गया है, और यदि tractor का उपयोग करते हैं, तो बैल का क्या होगा, क्योंकि हमने गौशाला बनाई है?
उत्तर : ये भी एक consider करने की योग्य मुद्दा है, अच्छी तरह से सोचना चाहिए। हमारा देश में हम समझता हूँ, tractor की आवश्यकता बहुत कम है। हमारे पास इतने बड़े-बड़े जमीन ही नहीं है, छोटे-छोटे जमीन हो चुका है, कल एक लंगोटी जैसे जमीन हो जाएगी आदमी के पास। थोड़े ही वर्ष में, इतने-इतने जमीन रहेगा आदमी के पास, ऐसा हो जाएगी। tractor ही नहीं घूमेगा। आप देखते भी जाइएगा, ये सब वो दिन आने ही वाला है। तो इस विधि से हम सोचते हैं तो, बैल की chances ज्यादा है।
दूसरा ओर, ये यंत्र क्या गलत है या सही है, ये दूसरी बात है। यंत्रो को बनाना, वहीं से शुरू हुआ है, मनुष्य के ऊपर विश्वास घटने के बाद। मनुष्य काम नहीं करेगा, मनुष्य काम करने में अलाली करता है, इसीलिए यंत्र से काम लिया जाए, यही इसका मूल मंत्र है। ये समझ मे आता है? आता है? बस हो गया खतम हो गया, हम कितना अच्छा सोचे हैं। यही पूरा कर देता है, सारे न्याय का। यदि हम आदमी जात को समझदार बनाते हैं, उस स्थिति में कोई भी ऐसा