16. मध्यस्थ दर्शन एवं चिकित्सा विज्ञान
👉 विडिओ संदर्भ देखें: video 3, time 1:04:34-1:15:18
प्रश्न : प्रचलित जो चिकित्सा विज्ञान है और आप जिस तरह चिकित्सा विज्ञान को प्रस्तुत करते हैं, उसकी थोड़ी सी व्याख्या कर दीजिए।
उत्तर :जहाँ तक चिकित्सा विज्ञान शरीर ज्ञान की बात है, विज्ञानी शरीर को पहचाने होंगे, मेरे विचार से। मेधस तंत्र से लेकर फेफड़े तंत्र तक। ठीक है ना? फेंफड़े तंत्र से लेकर वृक्क तंत्र तक, जितने भी तंत्रणाएँ हैं, इन सभी तंत्रों को जैसा भी अभी पढ़ाते हैं शरीर के सम्बन्ध में, शरीर शास्त्र के सम्बन्ध में पढ़ाते हैं, संभव है उसको जीव शास्त्र भी मान लेते हैं या क्या-क्या तो कहते हैं, हम नहीं जानते हैं। उसको मनुष्य शास्त्र भी मानते होंगे एक जगह में, आपके अनुसार। आपके अनुसार माने, प्रचलित विज्ञान के अनुसार। मेरे अनुसार माने मध्यस्थ दर्शन के अनुसार। ऐसा अपन पहले से एक सुगम परिस्थिति को बना लेते हैं। उस आधार पर क्या होती है? प्राण कोशाओं में मनुष्य को खोजने की कार्यक्रम चल रही है। ये बात स्पष्ट किया आपने।ठीक है? वो जो हमारे अध्यात्मवादी थे, आत्मा परमात्मा को ले करके और जीवन को बताना चाहता रहा। वो भी fail हुए, ये भी fail हुए। वो जैसा fail हुए, उससे अच्छा ये fail हुए। ये जितने अच्छा fail हुए, उससे अच्छा वो fail हुए। दोनों का बराबरी है।
इसमें कोई ज्यादा बत्तीस से चौंतीस दांत हो गया, ऐसा नहीं है। बत्तीस है दोनों का। दोनों का बत्तीसी बाहर है। जीवन का व्याख्या ना तो अध्यात्म विधि से हो पायी, ना भौतिकवादी विधि से हो पायी। यही तो रिक्तता है, मेरे अनुसार। यदि कोई भी एक विधि से जीवन का व्याख्या हो जाती, जीवन का स्वरुप समझ में आ जाती, समझाने की विधि तैयार हो जाती, उसके बाद हम जहाँ, जिस दीन-हीन स्थिति में पहुँच रहे हैं, दुर्गति में पहुँच रहै हैं, अनिश्चित अनिष्ट[1] घटना के कवलित[2] होने की जगह में जा रहे हैं - यहाँ हम नहीं पहुँचते। इसके बदले में और ही कहीं पहुँचते। अभी हम पहुँच चुके हैं। ठीक है? तो उसका मूल ध्रुव क्या है? धरती बीमार होना। धरती बीमार होने के बाद आप क्या कर लोगे? विज्ञान क्या करेगा, ज्ञानी क्या करेगा, मध्यस्थ दर्शन क्या करेगा? ठीक है? धरती बीमार होने के बाद कौन repairing करेगा? इतना आसान game नहीं है। हाँ, ये मध्यस्थ दर्शन इस बात का तो अपना दावा ले करके खड़ा है, तो मध्यस्थ दर्शन के अनुसार मनुष्य यदि अपने को व्याख्या कर लेता है, व्याख्या करने में समर्थ हो जाता है शिक्षा विधि से, उस स्थिति में जिस तरीके से, मानवीयता पूर्ण विधि से जीना बनता है, उसमें धरती को घायल करने वाला कार्य तो बंद हो जायेगी।ये बात की सच्चाई है।उतने की तो दवाई ले करके चला। और रह गया वो घायल हुआ भाग भरना - वो धरती भरेगी, उसको दर्शन तो भरेगा नहीं।