करने जब जाते हैं, के किस आधार पर उसमें वो ring बन गयी। उसके आधार पर कहते हैं, तरंग उसमें है तो ही ये ring बनेगा। अगर तरंग मूल रूप में नहीं है, तो प्रकाश का जैसा स्त्रोत या उसका प्रतिबिम्ब वैसा ही बनेगा।
ओ ठीक है।
उत्तर : जो प्रकाश का जो बात अभी आपने कहा, हम छत से कह रहे हैं, आपने दीवार से कहा, वो सब ठीक है। वो जितने भी नचाई दिखती है, आप कहते हो ring, हम कहते है नचाई, वो जो कुछ भी दिखते है, प्रकाश के अंदर जो molecules जितना नाचते रहते हैं, वो ऐसा दिखते हैं। इतना ही बात है।
प्रश्न : उसमे निश्चित केंद्र से परिधियाँ बनती है, वर्तुल बनते है, इसमें कुछ वर्तुल dark होते हैं फिर bright होते है हैं, polarisation कहते हैं इसको। ring बनने का विषय तरंग के आधार पर explain होता है।
उत्तर : तरंग बताने के लिए व्याख्यायें ये हैं, किन्तु वो तरंग होने वाली जो बात है material है उसको बताया, उस प्रकाश के अंदर जितने भी molecules रहते हैं, वो सबका नचाई बना ही रहता है। वो जिस model से बनता है, उसको आप अपने अनुसार व्याख्या करते हैं। हमको कहना है प्रकाश तरंग है, हम कहते हैं। कहिए, इसमें किसको क्या तकलीफ है?
प्रतिबिम्ब में कोई तरंग होता नहीं हैं। किसी वस्तु का प्रतिबिम्ब में कोई तरंग नहीं होता है, प्रतिबिम्ब रहता ही है।
प्रश्न : बाबा ये प्रयोग सबसे बढ़िया है। जैसे सामने कोई cardboard रखें, उसमें एक गोल छेदा कर दिए, उसमें एक गोला दिखना चाहिए। एक गोला ना दिखकर एक bright गोला दिखता है। उसके ऊपर थोड़ा सा एक हल्का चमक वाला गोला दिखता है।
उत्तर : वो वो चीज़ है, जो प्रकाश कहीं भी जा के टिका, वो जहाँ टिकने के पश्चात उसके आस पास के जितने भी अणु राशियाँ हैं, उसके ऊपर अनुबिम्बन, प्रत्यानुबिम्ब विधि बनी रहती है, उसमें दूसरा गोलाई जैसा दिखता है। इसमे कोनसा बड़ी बात है? हर बच्चे तो समझ सकते हैं इसको!
प्रश्न : एक नहीं बाबा अनेक गोलाई दिखता है।
उत्तर : अनेक इसीलिए दिखता है, ये जो पृष्ठभूमि है, जहाँ टिका है, वो resource है जितना दूर से आया है, वहाँ से यहाँ तक, परावर्तन, प्रत्यानुबिम्ब अनुबिम्ब की प्रक्रिया, वहां से ही शुरू हुआ है, इसीलिए अनेक ring दिखते हैं। इसमें क्या आपत्ति हुई? इसमे क्या तकलीफ है आपको क्या तकलीफ है?
(तकलीफ तो नहीं है लेकिन उसको ठीक ठीक परिभाषित करना पड़ेगा की उसकी जो intensity है, brightness है और darkness है, उसकी पूरी प्रक्रिया क्या है? निश्चित दूरी पर निश्चित intensity होती है, अंधकार की या प्रकाश की। कालेपन की या brightness की।