प्रश्न : ये पाते हैं कि दिन में रोज ज्वार भाटा होता है और ये पाया गया है कि पूर्णिमा और अमावास्या के दिन ज्वार भाटा बहुत ज्यादा हो जाता है?

उत्तर : हवा के आधार पर ज्वार भाटा है वो हर समय रहता है। हवा धरती की surface में घुम रहा है, ये तो आप को पता है, वो पानी के ऊपर भी बह रहा है, ये भी पता है। समुद्र में जो पानी के ऊपर जो हवा है तटिय स्थल में ही प्रदर्शित हो पाता है, उसको भी हर दिन की ज्वार भाटा हम कहेंगें। लहर होती रहती है। हर 15-15 दिन में ये बढ़ता है, घटता है। उसमें कम्पनात्मक गति हर 15 दिन में एक बार ऊपर नीचे होने वाला होता है, फलस्वरूप ज्यादा दिखता है।

प्रश्न : कंपनात्मक गति रोज नहीं होता है?

उत्तर : जो कम्पनात्मक गति है कुछ नहीं होता है ऐसा नहीं है जितना होता है होता ही रहता है, किन्तु 15 दिन में एक बार जो ज्यादा से ज्यादा होना है, वो हो जाता है। कम्पनात्मक गति तो हर गति में रहता ही है।

प्रश्न : इसका मतलब है कम्पनात्मक गति बदलती रहती है?

उत्तर : हर वस्तु में, हर परमाणु में कंपनात्मक गति है।

प्रश्न : कम्पनात्मक गति तो है लेकिन जितनी कम्पनात्मक गति है, वो वोही रहती है या कम ज्यादा होती रहती है?

उत्तर : कम्पनात्मक गति सदा बना रहता है। धरती का सिर जो है ना, उत्तर की जो ध्रुव है, ऊपर उठना नीचे होना बात होता है। वो भी एक कंपन है, उस समय में ज्वार भाटा अधिक होता है।

प्रश्न : तो वो ज्वार भाटा जो होता है जो गति है ऊपर नीचे होने के आधार पर हो रही है, लेकिन ये रोज ही होनी चाहिए, 15 दिन के बाद?

उत्तर : रोज में जितना कंपन रहता है उसके against में तो हवा ही चल रहा है, उसमें होने वाले ज्वार भाटा होता ही रहता है। जो ज्यादा ज्वार भाटा होता है उसके बारे में बात कर रहे हैं।

प्रश्न : इसका मतलब है हर 15 दिन में कुछ ज्यादा हिलती है?

उत्तर : हाँ हर 15 दिन में।

प्रश्न : पृथ्वी पर यदि किसी वस्तु को तौला जायें, यदि वो 6 किलो मिलता है, तो चन्द्रमा में उसी वस्तु का वजन 1 किलो मिलता है, ऐसा अभी विज्ञानिक मानते हैं। कम मिलता है इतना तो पक्का है।

उत्तर : जितना गुणा कम है, उतना कम मिलेगा। चन्द्रमा जितना बड़ा है, धरती की अपेक्षा में चौगुना होगा। चन्द्रमा के चौगुणा यदि धरती है, वहाँ 1 किलो होगा तो यहाँ 4 किलो होगा। यहाँ 4 किलो होगा तो वहाँ 1 किलो होगा। ये

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