प्रश्न : सारे परमाणु अंश एक ही जाति के हैं, मतलब उनका रंग तो एक ही हो गया?
उत्तर : परमाणु अंशों का संख्या भेद होने से ये सब चीज़ होता है, ये पता है? परमाणु अंश का एक दूसरे पर पड़ने वाली प्रतिबिम्ब ही है रंग। किसी विधि से प्रतिबिम्ब पड़ने से पीला दिखेगा, किसी विधि से प्रतिबिम्ब पड़ने से लाला दिखेगा, ऐसा बना हुआ है।
प्रश्न: मतलब वस्तु में रंग होते हुए भी, जो रंगों में परिवर्तन होता है, उसका मुख्य कारण प्रतिबिम्बन है। इससे और एक बात है, जैसे silica से या alumina से मिले हुए कई रत्न बनते हैं, मणि जिसको हम कहते हैं। वो पारदर्शी हो जाते हैं? मतलब रंगहीन हो जाते हैं, तो कई रंग रंगों के चीज़ों का आपस में प्रतिबिम्बन से रंगहीन भी हो जाते हैं?
उत्तर : ये क्या हैं, एक दूसरे के रंग को एक प्रकार से हजम कर लेते हैं, उस विधि से है वो। हजम करने का मतलब इस रंग के सामने ये रंग चुप हो जाता है, मौन हो जाता है। उसको कहते हैं, neutralization। इस ढंग से इसका काम बनता है। अलग-अलग देखोगे तो सब रंग दिखता है। जैसा अलग-अलग 4 रंग देखा, उसको चारों को एक जगह में ला दिए ये सब सफेद हो गया।
प्रश्न : वो तो होता ही है, alumina से कुछ रत्न बनते है, alumina का रंग कुछ और है। पूरा crystal formation का मतलब ज्यादातर रंगहीन हो जाना है।
उत्तर : जैसा कोयला, काला दिखता है। कोयला के आगे जो रचना है, वो graphite कहते हैं। वो graphite चमकदार होता है, कोयला चमकदार होता नहीं। graphite से आगे हीरा बनता है, केवल चमकदार रहता है, काला रहता ही नहीं, जबकि वो cent percent carbon कहा जाता है, किसको? हीरा को। उस पर electricity धायें से चलता है। अभी हीरे को पहचानते कैसे हैं? हीरे जैसा काँच को बनाना बहुत सुगम हो गया। इसको अलग कैसे किया जाए? हीरे के टुकड़े को बैठाते हैं, electrical charge करते हैं, नीचे बल्ब जलता है तो हीरा है, नहीं तो काँच का है। इस ढंग से परीक्षण किया जाता है।