उत्तर : सामान्य होने के लिए तो चुम्बकीयता में परिवर्तित होता है।
प्रश्न : मतलब विद्युत आवेश है इसलिए वो सामान्य होगा, सामान्य होने के क्रम में एक समय चुम्बक बन जाएगा पूरी तरह, चुंबकीय धरा में परिवर्तित हो जाएगा ?
उत्तर : चुम्बकीयता में परिवर्तित होकरके उसी को हम earth हो गया कहते हैं, सामान्य हो गया कहते हैं, प्रकृति में विलय हो गया कहते हैं।
प्रश्न : अपन धरती में कितना भी voltage तैयार करते हैं, voltage और current वो अपन earth कर देते हैं, तो, धरती उसको पी के खतम कर देती है?
उत्तर : इसीलिए विद्युत को खतम नहीं किया जा सकता, कोयला तो खतम हो जाएगा। विद्युत को यदि हम प्राप्त करते रहे विद्युत खतम नहीं होगा। क्योंकि घूमता ही रहता है।
प्रश्न : विद्युत को earth करा दिया तो उसका आवेश खतम हो गया?
उत्तर : आवेश खतम हो गया, earth से पुनः विद्युत मिलता रहेगा। इंधन विधि को बदलने के बाद भी, अभी जैसा प्रवाह बल से भी विद्युत को प्राप्त किया जा सकता है, विद्युत में कौन सा quality बदलेगा? विद्युत ही होगा। तो ये कोयला से होने वाली दुष्कृत्य बंद हो जाएगी।
प्रश्न : विद्युत आवर्तनशील है, कोयला आवर्तनशील नहीं है।
उत्तर : इतना ही बात है।
प्रश्न : ये जो विद्युत आवेश earth हो जाता है, इसका क्या मतलब है? कहाँ चला गया वो?
उत्तर : हर आवेश सामान्य होना है, ये पता है ना। आवेश कैसा हुआ था? चुम्बकीय धारा को विखण्डित करने से आवेश हुआ। वो आवेश सामान्य हो गया कहाँ? जहाँ चुम्बक ही बन करके सामान्य हो गया। चुम्बकत्व में परिवर्तित हो गया, धारा समाप्त हो गया, चुम्बकीयता रह गया। धरती की जो चुम्बकीयता है, उसी के साथ विलय हो गया। धरती में चुम्बकीय द्रव्य है, उसी की धारा को विखण्डित करने पर विद्युत मिलती है। वो टुकड़े-टुकडे होने पर जो आवेश होता है, उस आवेश को हम विद्युत कह रहे हैं। इसीलिए विद्युत और चुम्बकीय बल इसका नाम है। चुम्बकीयता को विद्युत से अलग नहीं किया जा सकता। अलग हो नहीं सकता।
प्रश्न : एक प्रयोग पूर्वक देखा गया है कि चुम्बक के दो ध्रुवों को रखकर, उसके बीच में किसी coil को यदि हिलायें, तो coil में विद्युत धारा चली जाती है। तो हम जितने शक्ति से उसको हिलाते हैं, क्या उतना ही शक्ति उस आवेश से मिलेगा या उससे कम मिलेगा?
उत्तर : कम।