उत्तर : ठीक है मान लेते हैं, ग्रह होगा उसका कोई व्यभिचार नहीं है, कोई अत्याचार नहीं है, वो जैसा पहले था। जैसा भैंस पूर्व काल में जैसा था, वैसा ही रहता है, तुम horn बजते रहो वैसे ही रहता है। वैसे ही चन्द्रमा भी है, गुरु भी है, ग्रह के रूप में।
प्रश्न : अपने यहाँ जो चाचा है ना, हर पूर्णिमा में पागल होता है, हर पूर्णिमा के समय आता है ना तो अपने यहाँ चाचा पागल होता है?
उत्तर : ठीक है ना दद्दा, मान लिए ना भाई, वो तो बात सब मान लिए, अब क्या चाहते हो?
प्रश्न : कारण?
उत्तर : कारण यही है, ऐसे समय में ज्यादा आदमी आवेशित होता होगा पागल होता है। आवेश ही ना होता है?
प्रश्न : बाबा आवेश की प्रेरणा है या ये आवेश का जो कारण है, ये चंद्रमा है क्या?
उत्तर : वो चंद्रमा कोई अकेले ने, बता तो दिया, हमारा जो भैंस जैसा आदि काल में चाल में था वो ही चाल में चंद्रमा है। आज एक ग्रह है।
प्रश्न : बाबा आवेश तो जीवन में होता है?
उत्तर : आवेश जीवन में हो, आवेश के बारे में, भ्रमवश आवेश।
प्रश्न : जी बाबा, तो ये पूर्णिमा और अमावास्या का इस आवेश से क्या कोई संबंध होता है?
उत्तर : हमको तो कोई संबंध नहीं दिखता।
प्रश्न : पागलपन में अपने माँ बाप को भी मार डाला?
उत्तर : ये तो बात हो गई है ना दद्दा, पागलपन का मतलब सब जानित हीं, ऐसा मान के चला।
प्रश्न : ये गाँजा पीने की वजह से हुआ होगा?
उत्तर : गांजा पिये, दारू पीवे, अफीम पीवे, चरस पीवे, कोई भी चीज़ खाए पिये, आवेशित हो गये, पागल हो गये, मर गये अब क्या करोगे तुम। अब मरने वालों के संख्या को आप खोजोगे कोई ना कोई एक दिन ज्यादा ही मरते हैं, आप ये मानिये।
प्रश्न : अभी जो survey हुआ है दुर्घटनाओं का, उसमे जो दिशा शूल वगैरह जिसको हम ज्योतिष में खराब योग मानते हैं ना, उस दिन सर्वाधिक दुर्घटनाएँ हुई हैं ऐसा भी survey report में है?