झाड़ के ऊपर से यही झाड़ के ऊपर से ज्यादा लोग गिरे, ये भी कहते हैं, ये सब चीज़ हम सुन कर आयें हैं। इसमें कोई शंका करने की जरूरत नहीं है, आप जो सुने हो में भी सुना हूँ, हो गया। हुआ भी होगा, शरीर को जीवन मानते तक ये सब संभव है। शरीर के अनुसार पागल होने वाले आदमीयों को कौन दिन पागल ना हो, हर दिन हो सकता है, हो सकता है ऐसे दिन में ज्यादा लोग हो गये, क्या बुरा हुआ, हो जाए।

प्रश्न : उसका कारण क्या है?

उत्तर : वोही शरीर को जीवन मानना।

प्रश्न : शरीर को जीवन तो हमेशा माने रहता है, उसी दिन ही ज्यादा असर क्यूँ हुआ?

उत्तर : अमावस्या और पूर्णिमा के दिन ज्यादा कामावेश हो जाए, भोगावेश हो जाए, लाभावेश हो जाए और कोई आवेश हो जाए, हो जाए, क्या बुरा हुआ? कोई ना कोई आवेश के बिना आदमी पागल नहीं होता है ये सही है।

प्रश्न : उस दिन, पूर्णिमा दिन सबसे ज्यादा आवेश क्यों हुआ?

उत्तर : आवेश इसलिए होगा मनुष्य जो है ना उन दिनों को अनुकूल माना होगा। पूर्णिमा अमावस्या या और कोई संधि कालों में मनुष्य को इस प्रकार के संवेदनशील आवेश अधिक होता होगा, इसलिए आदमी पागल हो जाता है, रोगी हो जाता है।

प्रश्न : होगा की भाषा में आप मत बोलिए, होता है, क्यों होता है उसको बताइए?

उत्तर : आवेश से होता है, ये बता तो दिया।

प्रश्न : आवेश कैसे पैदा होता है?

उत्तर : आवेश इन्हीं तीन, संवेदनशीलता के आधार पर।

प्रश्न : अभी तक जो मान्यता रही है ना, चंद्रमा की वजह से आदमी की संवेदनशीलता बढ़ जाती है?

उत्तर : ठीक है दद्दा, चंद्रमा जो लफंगा ग्रह है, पहले से हमारा इसमे लिखा ही है। ये लिखा हुआ है भाई - lunatic। ज्योतिष शास्त्र में चन्द्रमा को कोई संयतशील ग्रह नहीं माने हैं, और चन्द्रमा और शुक्र ये दोनों को अय्याश ही माने हैं। किताबों में लिखा है, गुरु को व्यभिचारी ग्रह। गुरुजी को, गुरु महराज जी को, लिखा नहीं है, चंद्रमा के यहाँ जा करके व्यभिचार किया है, लिखा है कथा, अब उसके बाद क्या करेंगे हम। इन्द्र तो हर जगह में व्यभिचार किया है, उसका पूजा करते ही हैं, आदमी ऐसा चाहता होगा, इसीलिए ना पूजा करता होगा।

प्रश्न : नहीं उसको थोड़ा अलग करना पड़ेगा बाबा, गुरु नाम का एक व्यक्ति जो देवताओं के गुरु थे अलग हैं, और गुरु नाम का एक ग्रह, दोनों को जोड़ के अपन क्यों?

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