प्रश्न : नहीं ज्योतिष में ऐसा संकेत तो देते हैं बाबा कि एक विशेष ग्रह के प्रभाव के कारण इसकी मानसिकता के झुकाव का जो ज्यादा दबाव है ये इस दिशा में है, मानो क्रोध की दिशा में, काम की दिशा में, लालच की दिशा में जाएगा या ज्ञान की तरफ जाएगा, विद्या अध्ययन की तरफ जाएगा, इतना तो लोग बताते हैं पर उसके बाद फिर उसके बाद वाली घटना को आप बता रहे हैं।
उत्तर : ठीक है, हम इसमें नहीं कह रहे हैं, ये सब हम नहीं बताते हैं नहीं कह रहे हैं। अभी हमको ये ही पता नहीं है विद्या क्या है, अध्ययन क्या है, ज्ञान क्या है, ये सब भाषा को हम प्रयोग कर डाले हैं। माने अपन खोखले कहाँ हैं, हमको खुद को पता नहीं है ज्ञान क्या है, विद्या क्या है ये पता नहीं है, हम इस ओर अपन prediction करते हैं। अच्छा इसी को पहचानने की जरूरत है, क्या चीज़ कम होने से परंपरा में इस प्रकार की करतूत होने लगी। उसके बारे में हम बताया अभी वस्तु के बारे में बताया आदमी को समझदार हो करके जीने पर हर जगह में काफी अच्छे ढंग से जी सकता है। उसी प्रकार अपन कोई common rod, हर जगह में कोई common rod को, common field को पहचानने की आवश्यकता है। उसको पहचाने बिना आदमी आदमी में एकता को पहचानना बहुत मुश्किल है। एकता पहचानते नहीं हैं तो फिर बाद में ज्योतिष क्या है? कोई एकता का सूत्र मनुष्य में हो, उसके आधार पर सारा ज्योतिष को launch कराया जाए, काम करेगा, हमारा सोचना ऐसा है।
प्रश्न : एकता के सूत्र से आपका क्या आशय है?
उत्तर : एकता का सूत्र का मतलब ये है बाबा, प्रत्येक इकाई अपने त्व सहित व्यवस्था, समग्र व्यवस्था में भागीदारी, एकता की सूत्र यहाँ इस ढ़ंग से आता है।