उत्तर : ये सब जो है ना कुनबा जोड़ने की बात है। कोई भी घटना हुआ हम तो इसे वस्तु से जोड़ेंगे, दिशा से जोड़ेंगे, जोगनी से जोड़ेंगे, नक्षत्र से जोड़ेंगे, करण से जोड़ेंगे, सबसे जोड़ लेगें हम, हम तो चतुर आदमी हैं ना भाई, हम को कौन रोकेगा। हमारा मन की पकौड़ी को हम कैसा खुबसूरत में रखना है, हम सब जानते हैं। हम समझता हूँ ऐसा कोई आदमी खामी नहीं है, ये इसके generalize करने पर यही हमको दिखता है, आदमी जो है ना अपने भ्रमवश संवेदनशील उछालों में आ कर आदमी पागल होता है, और कोई ना कोई आशा बड़ी निराशा में परिवर्तित होने पर पागल होता है, तीसरा कोई ना कोई नशा पदार्थों को सेवन करके, आदमी पागल हो जाता है। कोई ना कोई घटती ही है, आदमी पागल हो जाता है, आदमी पागल होने के बाद जितना नुकसान पहुँचा सकता है, पहुँचाता भी है। उसके बाद बाकी लोग सब लोग मिलकर के उनका नुकसान पहुँचा देते हैं। इतना ही तो हुआ है। इसमें ना चन्द्रमा का ना वृहस्पति का दद्दा, वो भैंस जैसे है, उसमें कोई भी किसी को पागल बनाने का काम नहीं है। हम आपको दूसरे बात बताते हैं, इस धरती के लिए सभी ब्रह्मांडीय किरण अनुकूल होने के बाद, ये धरती विकसित हुआ है। उसके बाद हम लोग बात करते हैं तो हम क्या कर डालूँ बताओ?

प्रश्न : तो बाबा इस बात को स्वीकारनें के बाद, ज्योतिष के द्वारा जो अपन अशुभ प्रभावों की जो गणना करते हैं वो पूरा ध्वस्त हो जाता है?

उत्तर : वो पुनः विचार करने की मुद्दा है, लाज बचाना होगा तो पुनर्विचार करना पड़ेगा। यदि लाज बचाना नहीं है तो अपन ऐसे ही बताते ही रहेंगे।

प्रश्न : पूरा हिल जाएगा ना बाबा ?

उत्तर : हिलना क्या है, देखो ग्रहों का प्रभाव है, इस बात तय है। धरती का भी प्रभाव है दूसरे ग्रहों के ऊपर, और ग्रहों का प्रभाव धरती पर भी है, इसको आप एक ध्रुवाँक बनाइये। परस्पर ग्रहों का प्रभाव इस धरती में ये गवाहित हो चुकी है, अनुकूल है।

प्रश्न : अनुकूलता का परिभाषा?

उत्तर : अनुकूलता का परिभाषा ये है, यहाँ विकास हो चुकी है। अनुकूल नहीं होता तो बिलकुल इसमें कोई विकास ही नहीं होना था। ये बात पूरा होता है, यहाँ एक त्रिताल टूटती है। अब इसको ध्रुवाँक मनाते हैं आप, यदि इसको नहीं मनाना हो तो अपन मनमानी करवे करेंगे। इसको ध्रुव के रूप में स्वीकार करते हैं, जो ज्योतिषी कि जितने भी पहल है, सोचने की, समझाने की और निर्णय लेने की, जो तरीके हम अभी तक अपनाये हैं, उसको पुर्नविचार करना चाहिए। मेरा request ऐसा है। यदि नहीं करना हो तो उदारता है।

ये क्या बताया, ब्रह्मांडीय किरण इस धरती के लिए अनुकूल है। आदमी क्यों पागल होता है उसको खोजिये आपको मिलेगा, संवेदनशीलता की उछाल से, नशाखोरी से, बददिमाग से, बदकर्मों में ज्यादा से ज्यादा सफल होने से आदमी पागल होता है, ये तो सब देखा हुआ बात है। ज्योतिष में उसको बताएंगे नहीं। इसको कोन ज्योतिषी बताया है, कोई नहीं बताया है।

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