का औकात अभी तक तो आदमी जात के पास नहीं है। चुम्बकीय धार बनी रहती है यहाँ से ऊपर फेंका हुआ वस्तु के साथ, इसको प्रमाणित करने का औकात इस धरती के 700 करोड़ आदमी के पास नहीं है। जबकि हम नाम देते हैं गुरूत्वाकर्षण।
उसको हम देखने के बाद क्या भाषा दिया? ये तरल तरल के साथ, विरल विरल के साथ, ठोस ठोस के साथ, सहअस्तित्व को प्रदर्षित करने के लिए, जितना बल से जो चीज़ नीचे से ऊपर जाता है, वो अपने-अपने प्रजाति के साथ सहअस्तित्व को प्रमाणित करते हैं। ऐसा हम व्याख्या किया। ये व्याख्या ठीक है, आप जो व्याख्या किए हो वो ठीक है, दोनों को तोलिए। क्या बात है! यह सहअस्तित्व का प्रधान प्रमाण है, ये नित्य प्रमाण है, एक दिन के एक क्षण का प्रमाण नहीं है। हर दिन, हर रोज़-म्मर्रा में मिलने वाली प्रमाण है। इसको हम प्राण दिए जा रहें हैं - गुरुत्वाकर्षण, सापेक्षवाद। ले जाओ, आदमी को कहाँ ले जाकर गुमराह बनाना है, बना लो भाई! कटा लो, काट लो। अव्यवस्था को प्रतिपादन करने के लिए ये इस प्रकार की व्याख्या हुई। अव्यवस्था को व्याख्यायित करके हम आश्वस्त हो नहीं सकते। आदमी जात तो नहीं हुआ, बाक़ी कोई हो जाए तो हम उसको शोध किया नहीं है। जब कभी शोध करूँगा, बताऊँगा। आदमी को व्यवस्था को व्याख्यायित करके ही हम आश्वस्त हो पाएँगें, अव्यवस्था की उम्मीद में, अव्यवस्था की व्याख्या को ज्ञान मानकर हम आश्वस्त होना इस धरती पर बनेगा नहीं।
प्रश्न : ये प्रभाव जिस स्थिति में है, ये किस ढंग से प्रभावी हो रहा है, थोड़ा सा उसको स्पष्ट कर दीजिए। चुम्बकीय बल जो ऋणाकर्षण, धनाकर्षण के रूप में है, उसका प्रभाव बल जो स्थिति के रूप में बना हुआ है, स्थिति के रूप में अपना आकार, आयतन से अधिक प्रभाव कैसे बना कर रखता है?
उत्तर : चुम्बकीय बल का मतलब होता हे, एक दूसरे के साथ निश्चित अच्छी दूरी पर जुड़ने की हिकमत है ये, ये हिकमत अस्तित्व सहज है। अस्तित्व में ही ये युक्ति लगी हुई है। ये युक्ति हर वस्तु के साथ है। हर परमाणु में है ये, हर परमाणु के मध्यांश में ये चुम्बकीय बल का प्रदर्शन बना ही रहता है। उसका प्रमाण है - हर परमाणु अणु में अणुगठन में होता है। हर अणु एक रचना गठन में रहता ही है। ये आपको दिखता है, मुझको दिखता है, अँधरा को समझ में आता है। इसके लिए आपको lab की ज़रूरत नहीं है। हर परमाणु में चुम्बकीय बल रहता ही है। वो कहाँ रहता है? मध्यांश प्रदर्षित करता है। उसके अश्रित अंश, परिवेशों में घूमने वाले अंश चुम्बकीय बल को प्रदर्षित करते नहीं हैं। वो क्या करते हैं? वो प्रभाव क्षेत्र को बनाए रखते हैं। क्या बात है! चारों तरफ घूमने वाले अंश क्या बनाए रखते हैं, उनका क्या प्रयोजन है?
वो अपना प्रभाव क्षेत्र को बनाए रखता है, अपना identity को बनाए रखता है। कितना बड़ी साहसिकता की काम है, कितना अद्भुत वर्चस्व है, एक परमाणु का, आप सोच लो! चुम्बकीय बल तो सब में होता ही है, एक बात बताया। अब क्या है, आप हमको ये पता है, कुछ वस्तु हैं विद्युतग्राहि हैं, कुछ वस्तु हैं विद्युत ग्राही नहीं हैं। जैसा अभी आप कहते हैं silicone की बात, वो विद्युत ग्राही नहीं है। वो किसी का संयोग होने के बाद ही वो विद्युतग्राहि होता है। वो अपने आप में विद्युतग्राही नहीं है ऐसा आप declare करे हो।
प्रश्न : semi-conductor है वो, अर्ध विद्युत ग्राही है वो।