random program नहीं है, ये detail program है। अभी तक हम सोचते हैं ऐसा ठीक है। उसमे हमको कोई हस्तक्षेप नहीं है। इसकी जो है ना, इस प्रकार की सोचते हैं, पागल होने की भाग है, वो आप हम को स्वीकार नहीं है और ज्ञानी होने कि रास्ता को wind-up किया जाए।
(ज्ञानी होने के लिए जितना करना चाहिए वो तो अपनी-अपनी समझदारी कि स्थिति से कर ही रहे हैं, उसमे कोई दो मत नहीं है। इन चीज़ो का यदि सहयोग मिल जाए?)
मिल जाए क्या होता है? सहयोग मिलता ही है बता रहे हैं। पुनः वोही बात, उसके लिए भैंस बाँधोगे, बकरी बाँधोगे, वो तो पूर्णिमा होता ही है, अमावस्या होता ही है।
(बाबा कोई मणि पहन लें ?)
हमारे अनुसार कोई मणि का प्रभाव नहीं है।
(बाबा आप पूरे रत्न विद्या को धो देंगे बाबा, ज्योतिषियों का क्या होगा?)
बताइए महाराज जी, हो तब ना भई! तो हम साधना करते रहे, ठीक है? वो एक रत्न व्यापारी आया Bangalore से, संयोग से हमारे पिताजी के मित्र निकल गया। अच्छा, उसका एक रत्न, माने हीरा, 6 महीना पहले गुम गया था, ठीक है? तो वो आया जब हमको रत्न दिखाने के लिए, अपना पेटी खोला, उसी पेटी में एक कोने में चपका रहा, वो मणि। वो उसको मिल गया, बेहद खुश हो गया - यहाँ आ गए मणि मिल गया, आपको बता रहे हैं, इसमें हमारा क्या चीज़ है? यदि वो आदमी गाता है, उनका बुद्धिहीनता के अलावा क्या चीज़ हो गया इसमे?
(वो तो परिणाम के आधार पर गाता है बाबा)
(उन्ही का चीज़ उनको मिलना, उसी दिन क्यों मिला, दो दिन पहले मिल जाता?)
ठीक है ना दद्दा, किन्तु उस दिन मिलने से क्या तकलीफ हो गया? (खुशहाली हो गई, आपके संगत मे आने से खुशहाली हो गई) उस दिन उन्होंने सभी रत्नों का दर्शन कराया। हम स्वप्न मे भी नहीं सोचते रहे सभी मणियों को ला करके, अमरकंटक में आ करके हमारे पास बैठ करके।
(बाबा एक सूत्र है पतंजलि ज्ञानसूत्र) हाँ वो लिखा है ना “आस्थेय प्रतिशठायणं, सर्व रत्न प्रस्थानम”। (उसी दिन हो गई) बस बस बढ़िया हो गई। (इसका आशय क्या है, तो जो व्यक्ति चोरी नहीं करता है, उसके सामने सभी रत्न उपस्थित हो जाते हैं) छप्पर फाड़ के, उसका ये उदाहरण है। वो एक दिन रहा, दो दिन रहा हमारे साथ, थोड़ा सा हमारा साधना इसके बारे में सत्संग होता रहा। तो वो जा करके हमारे साधना में मदद हो, ऐसा रत्नों को भेजा, एक अंगूठी बना करके। चाँदी की अंगूठी मे एक नीलम रखा, एक पन्ना रखा, एक हीरा रखा - 3 मणि को एक जगह में करके एक अंगूठी बनवा करके भेजा। उन्होंने बोला था, इसको अमुक दिन पहन लेना। पहन लिया और दो दिन, तीन दिन हो गया, वो तीनों मणि, हम स्नान करते रहे कुंड में, उसमें वो गिर गया। तीनों, एक ही दिन, स्नान करत रहे,वो तीनों कुंड मे समा गए। तो हम घर आया, बताए, ठीक है, तो कैसे इस प्रकार से नर्मदा जी मे अर्पित हो गए। उसका