ज्यादा स्वस्थ दिखते हैं। इसको हम लोगों ने बीस जगह में प्रयोग करके देखा है। इसको क्या करोगे? क्या है वो? ये भी ऐसा नहीं है कि patent और तुम नहीं जानते हो, property right - ये सब चीज़ कुछ भी नहीं है उसमें। साधारण रूप में जो चीज़ें हैं, जो उसका कषाय बनाते हैं। कषाय बना करके, उसी के अन्दर गुड़ को डाल करके वो कषाय को पिलाते रहते हैं केवल। पिलाते पिलाते पिलाते 20 बार पिलाते तक में एक शौच होता है, उसके बाद ज्वर उतर जाता है। वो काढ़ा को पिलाते रहते हैं 3 दिन तक। उस बीच में पथ्य परहेज बताते हैं, वो ठीक हो जाता है। इसको क्या किया जाए? मुकदमा चलाया जाए?

प्रश्न: तो बाबा इससे ये समझ मे आया की शरीर को स्वस्थ बनाये रखने के लिए वर्तमान में आयुर्वेदिक system ज्यादा अच्छा है, जैसे एलोपैथी है या होम्योपैथी है इनके comparison में?

उत्तर : हमारा कहना ये है - हम यदि ऐसा conclusion निकाल लिए हैं, तब तो उसके अलग talks होते हैं। तो कैसे शरीर को भावी रोगों, भविष्य में होने वाले रोगों से बचाया जा सकता है - एक विधि वो बनता है। रोग आ ही गया है, उसको तत्काल कैसे शमन किया जाए, रोग असाध्य रूप धारण कर लिया जाए, उस स्थिति में हमको क्या -क्या करना चाहिए। उस ढंग से तीन चरण में इसके बारे में एक अच्छी पैठ पैदा किया जा सकता है। ठीक है? और इसके लिए अलग से ही एक meeting होगा आप हमारे बीच में, इसको फैसला किया जा सकता है। ठीक है ये?

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