देख करके अनेक लोग सुखी हो सकते हैं, अनुकरण कर सकते हैं, अच्छे ढंग से जी सकते हैं। इसको छोड़ करके दूसरा उपाय अपनाया वो तो चले ही जाना है उसको मान लीजिए, उजड़ना ही उजड़ना है।

प्रश्न : उन्नत बीज बनाने के लिए एक संकर विधि अभी हम लोग देख रहे हैं वैज्ञानिक लोगों के द्वारा, तो क्या उन्नत बीज बनाने की और कोई दूसरी विधि है, जो परंपरा को स्थापित कर ले?

उत्तर : ये जो उन्नत बीज का मतलब क्या है- वाला बात है? ज्यादा पैदा होना एक तो भाग ये है, गुणवत्ता उसका बढ़िया होना, दो। तो में समझता हूँ, लोगों का सोचना ऐसा है, वास्तविकता क्या है? दोनों को कुछ सोचने की बात है। हम एक छोटा सा कृषि करते हैं, छोटा सा जगह में। देशी बीजा और गईया का खाद डाल करके हम दाना पैदा करते रहे हैं। यद्यपि हम छोटा सा जगह में करते रहे, हमारा आवश्यकता कम रहा, ये सब बातें हमारे साथ जुड़ी हुई बात सही है। इसके बावजूद हम देशी बीजा, देशी खाद घर का खाद डालकरके हम देशी बीज से एक एकड़ जमीन में 45 बोरा धान से 50 बोरा धान पैदा किए हैं। धान का हम वजन देखे हैं, जिस प्रकार के हम धान पैदा करते हैं। अभी भी हमारे पास वो बीजा है, हम हर वर्ष उसको डालते ही हैं। उस बीजा में, एक बोरा बीजा 80 किलो होता है। मैं समझता हूँ, धान में, उससे अच्छा कोई वजनदार धान कोई होगा नहीं। अभी हमारे सामने जितने भी हम धान देखें है, उससे अच्छा वजनदार नहीं है।

दाना के स्वरूप में छोटा सा छोटा दाना है, बहुत छोटा दाना। लम्बाई भी छोटा है, मोटाई भी छोटा है, उसको हम लोग “प्रेम कोदई” कहते हैं। कोदई जैसा दाना, इस प्रकार की दाना का नाम है। इस दाना को हम खेत में डालते हैं, और उससे पैदा होता है, उसको करते रहे। तो अभी 10-15 वर्ष पहले तक, हम करते रहे, उसके बाद हमारे बच्चे, पढ़े-लिखे आ गये, उसके बाद हम सोचा किं ये पढ़े-लिखे हैं भई, अब ये बुद्धिमान हो गये हैं ये करेंगे, पता चला 10 वर्ष करते तक में एक एकड़ में 5 बोरा धान गाहे (उगाए) गये। हमारा घर की बात हम कह रहे हैं, दुनिया की बात हम नहीं जानते हैं, हमारा घर की बात हम कह रहे हैं। 5 बोरा धान उसी खेत से गाहे गये। मेंने पूछा कि ये सब क्या हो गया, वो कीड़ा काट दिया, बैठ गया, धस गया, सड़ गया, गोल हो गया, ये हो गया, वो हो गया बोले, ठीक है, आगे वर्ष ठीक हो जाएगा।

आगे वर्ष किये, आगे वर्ष पुनः 4 ही बोरा हुआ। अब क्या हो गया, पुनः वो सब हमको वोही सब पुराण पंचांग बताते ही रहे, ये कब तक होगा? ये होते-होते थोड़े सा ज्यादा ही लगा कि ये ठीक होने वाला नहीं है,अभी हम लोग पुनः गत वर्ष से थोड़ी सी उस ओर ध्यान देना शुरू किया, गत वर्ष थोड़ा सा खाद ला करके डाले गये, गत वर्ष थोड़ा सा अच्छा हुआ था, 18-20 बोरा धान हुई थी। इस वर्ष किये हैं, अभी कहाँ पहुँचते हैं, देखेंगे, ये हमारा रोग-राटा कहो या रोना धोना कहो या खुशहाली कहो, कुछ भी कहो, हम स्वयं बैठे हैं आपके सम्मुख, हमारे ही घर गाँव की बात है। तो ये तो हो गई खाद, वो ही रसायन खाद, उन्नत बीज ये सब डाल करके अंततोगत्वा वो खेत अभी कितने दिन में वो ठीक होगा, पाक में आएगा, वो अपने स्वरूप में आएगा, हम तो अभी भी नहीं कह पा रहे हैं। अब इस वर्ष भी हम देशी खाद ही डाले हैं, गत वर्ष भी डाले थे। इस वर्ष फसल को देखते हैं, लगता है कि फसल देखने में तो ठीक लगता है, जब बीजा घर आएगा तभी न पता लगता है किसान को, उसके पहले अपने को क्या पता लगता है।

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