घर में आ गया वोही किसान का धन है, वो तब तक धन नहीं है, मेरे अनुसार, आप लोग कैसा सोचते हैं पता नहीं है। तो इस वर्ष भी ऐसा कर रहे हैं।
हम सोचते हैं, पढ-लिख करके, विज्ञान बहुत सही काम कर रहा है, ये सोच के चलें, ये माने एक प्रकार से भगवान सबकुछ करता है सोच करके हम सब बातों को भगवान को जोड़ते रहे, भगवान कुछ करता-वरता एक भी नहीं है। भगवान से हमारे बातचीत हो गई है। भगवान को कोई फुरसत नहीं है, किसी को मिटाने के लिए, किसी को बनाने के लिए, आप मानिये, उनके पास ऐसा कोई दफ्तर नहीं है इसको मिटाते रहो इसको बनाते रहो। भगवान ऐसा कोई बुद्धू भगवान कोई बैठा नहीं है अस्तित्व में।
परम उन्नत बीज वही है, जो आइ आर -36,32 जितने भी कहते हैं ना एक एकड़ में कभी भी मूड़ पटक के मर जाएं, 50 बोरा धान, अच्छे से अच्छे जमीन में, और रसायन खाद कुड़िया ले, उसके ऊपर जितना कीटनाशक दवाई है उड़ेल दे, 50 बोरा धान उगाने वाला इस छत्तीसगढ़ में एक भी आदमी नहीं मिलेगा, एक भी आदमी नहीं मिलेगा, उसको उन्नत बीज कहित हैं। हम जो पैदा करत हीं क्या उन्नत बीज नहीं है ये। ज्यादा उपराज की बात कहते हो, वो सऊर से कास्तकारी किया जाए ये जीतने भी हमारे पास धान हैं सभी उन्नत धान हैं, ये आपको याद दिलाना चाहेंगे। सभी प्रजाति की धान, ये उन्नत प्रजाति है। और इसको घटिया बना करके उन्नत के नाम से हम बेचते है। क्योंकि पैसे से लाते हो, इसीलिए उन्नत हो गया। घर में रहत है तो कोई उन्नत न होई, वैसे ही खाद गोबर हो गया।
प्रश्न :जैसे बासमती धान है, एक एकड़ में बहुत कम होता है, ‘‘प्रेमकोदई‘‘ बहुत ज्यादा होता है, ऐसा क्यों होता है?
उत्तर :वो बात थोड़ीसी और सोचने की बात है। देखिए ये सुगंधी वाला धान होता है जितने भी, ये इतना ज्यादा धान होगा नहीं। हम सुगंधित धानों में देशी धान, बासमती भी यहाँ के स्थानीय नहीं है यद्यपी देशी है, सबसे कम धान होने वाला जो प्रजाति देखा, बासमती धान कम से कम होता है, जैसा इस देश मे छत्तीसगढ़ में “काली मुछ” नाम की एक धान पैदा करते हैं, बहुत अच्छी धान कहलाता है, सुगंधित दाना, वहाँ जो विष्णुभोग नाम की पैदा करते हैं, छत्तीसगढ़ में एक और दुबराज, दुबराज धान का गंध तो चला गया, दुबराज नाम रह गया है,ठीक है ना। वो गंध तो मर गया पूरा का पूरा, अब दुबराज में गंध नहीं है। लोहंधी धान भी काफी अच्छा होता है। वो जो‘‘प्रेमकोदई‘‘ होता है उसके बराबर नहीं होता।30,40 बोरा के बराबर पैदा होता है।और एक होता है उसमे ज्यादा झरन देखते हैं ,ओ भी ऐसे ही 50 बोरा होता है। तो कहना ये है, हमारे पास जितना धान का बीजा है, वो सर्वोपरी उन्नत बीजा है। उससे ज्यादा उन्नत बीजा, ये 2000 वर्ष ये लेबोरेट्री में बरबाद करते रहें, तभी भी उससे ज्यादा उन्नत बीजा ये बना नहीं पायेंगे, 2000 वर्ष उन्नत बीजा बनाते जाओ, एक एकड़ में 50 बोरा धान पैदा करने वाला धान को ये दे नहीं पाएंगे। जब कभी कोई देखना चाहते हैं हम उपराज करके दिखा दूँगा, आप आओ हमारा घर नाप तोल के देख लो, हम किये हैं, अभी भी कर सकते हैं।ये बात ऐसी है। इसीलिए विश्वास ये रखना चाहिए, अपने घर गाँव में जो कुछ भी बीज है, यहाँ का वातावरण के लिए सर्वोपरी एक प्रकार से धरोहर हो गया है, यहाँ के लिए अनुकूल हो गया है, हमारे आपके लिए अनुकूल हुआ है, धरती के लिए अनुकूल हुआ है, हवा, पानी के लिए अनुकूल हुआ है, इससे अच्छा हाइब्रिड क्या होगा।