इससे ज्यादा उन्नत बीज क्या होगा? और यहाँ के हवा के लिए अनुकुल ना हो, जल के लिए अनुकूल ना हो, आदमी के लिए अनुकूल ना हो, उपराज के लिए अनुकूल ना हो, खाद के लिए अनुकूल ना हो, और कीट नाशक उपायों के लिए अनुकूल ना हो वो सब हाइब्रिड है।ले जाव पैसे दे आ लावा दरिद्र हो जावा इसके अलावा कछू होएगा नहीं यहाँ। ये कुल मिलाकरके कास्तकारों पर जो विज्ञान और व्यापार दोनों का संयुक्त गाज गिरा है, बात ऐसा है, इससे फायदा नहीं है। इस पर विश्वास रख करके हम कहीं पहुँचेगें नहीं, सिवाय परेशानी मोल लेने के।
प्रश्न : Tissue culture क्या है? प्राकृतिक है या नहीं?
उत्तर : देखो कल ओ बात हो गयी ठी संकेत ठाकुर से उनका जो है वास्तविक अंकुर को ले करके ही, वो अंकुरो को पैदा करते हैं। जैसे केले का, केले का मूल अंकुर से ही शुरू करते हैं वो। उससे यदि परंपरा यदि बनता है। परंपरा नहीं बनता है, तो वो ठीक नहीं हैं। Tissue culture से जो केले का पेड़ बनाया, उसमें से जो पीका आता है, वैसे ही केला वो देता है, तब तो ठीक है।
प्रश्न :इस तरीके से धनिया है उसकी सुगंध कम हो जाती है, उसका स्वाद खतम हो जाता है, इसका क्या कारण है?इसको क्या मानेंगे ?
उत्तर :इसका कारण ये है, धरती का जो एक स्वाभाविक गुण है, धरती में जो कुछ भी हरियाली पैदा होता है, उससे खाद होता है, उसको जीव जानवर खा कर भी खाद ही पैदा करते हैं, और वैसे भी यदि धरती में मिलता है, तो खाद ही होता है। धरती वो सब को पचाता हे, अभी भी अपन गईया का खाद गढ्ढे में डालते हैं, वो पूरा का पूरा धरती ही उसको पचाता है, पचने के बाद हम खेत में डालते हैं. पौधे, उसको लेने के लिए बहुत अच्छी सुगम परिस्थिति बनी रहती है। अभी जो खाद आती है, उसमें अम्ल और क्षार दो प्रधान वस्तु होती है। वो शनैः-शनैः धरती में अम्लीयता को या क्षारियता को बढ़ाता चले जाता है। कोई ना कोई एक तो बढ़ेगा ही। आप उसको कुछ नहीं कर सकते। बढ़ने के बाद किसी तादात् तक बढ़ गया, उसके बाद वो ऊसर हो गया, ऊसर होने के बाद वो कहते है, एक फुट मिट्टी काट के बाहर करो, पुनः एक फुट ऊसर बनाओ, ऐसा विज्ञानिक कहते हैं।करो भाई ऐसा कहते देखा है लोगों को मारपीट होते हुए देखा है,गलीगलोच करते हुए देखा है,झगड़ा होते हुए देखा है।सभी प्रकार की प्रजातियो को हमने देखा है।ठीक है तो इसलिए मेरे अनुसार रासायनिक खाद में ये दोष छूटा हुआ कोई खाद होगा, ऐसा हम को पता नहीं है, यदि होगा तो उसको परीक्षण करने की बात है।ठीक है। अम्लीयता या क्षारियता दो में एक को धरती में बढ़ाएगा ही बढ़ाएगा। उसको आप-हम कहीं रोक नहीं पाएंगे।