तो कुएं की जगह में नल हो गया। ठीक है ना भाई, या नहीं तो बोरवेल हो गया। और बोरवेल जो है ना, जिस दिशा में हम कहेंगे, उस दिशा में पानी नहीं होगा तो क्या करेंगे? जहाँ पानी मिलेगा वहीं बनाना पड़ेगा। ये सब बाधाएं आ चुकी हैं। कहने का मतलब ये सब पहले की जो traditional वास्तु के जगह में जो बाधाएं आई हुई चीज़ हैं, अब वो बाधा को क्या करोगे? वो बाधा उसको tradition को यदि करेंगें हम कुछ करवे नहीं करें, ऐसे अड़चन जहाँ है वहाँ। नहीं, उसके लिए जो है हमारा सहमति यही है, जो दिशा स्पष्ट होना आवश्यक है, हर वास्तु में। अभी शहरों में ये भी एक भयंकर कष्ट है, दिशा स्पष्ट रूप में शुरुआत ही नहीं हुआ है। माने पूर्व, पश्चिम, उत्तर, दक्षिण के आधार पर सभी इमारत बनेंगे, ऐसा बन ही नहीं सकता। ऐसा हो गई। वो भी एक वास्तुशास्त्र के खिलाफ जाने वाली एक काम है, ठीक हो गया। अब क्या किया जाय? अब यही किया जाए, हवा, उजाला, दो को प्रधान रखा जाए। उसके बाद जो material का जो कुछ भी आप सोचते हो, उसको कम से कम क्षरण हो इस पर ध्यान दिया जाए। ये सबको adapt होने वाली वास्तु का एक बात हुई।

अब रह गया उसका foundation वगैरह। foundation के बारे में जो हमारा सोचना ऐसा है, पहले की जो foundation की बात ये थी, तो नाभी मात्र जगह को जितनी जगह में हमको एक घर बनाना है, देवालय बनाना है, स्मारक बनाना है, नाभी मात्र जगह को खन करके बाहर करो। मिट्टी को बाहर करो। उसमें जली हुई मिट्टी को भरो, ये कहा है। क्या अभी संभव है? यदि कर सके तो बहुत अच्छा काम। इसमें दो राय नहीं।

प्रश्न : बाबा जली हुई मिट्टी से मतलब?

उत्तर : जली हुई मट्टी का मतलब लाल मिट्टी, मुरूम इसी को माना जाये। तो अभी की स्थिति में यदि वो कर सकेंगे, स्वास्थ्य के लिए अत्यंत उत्तम। नीचे से जो प्रभाव पड़ता है surface पर, उसमें बहुत उपकार होगा, ये मानिए।

प्रश्न : बाबा जैसे चूल्हा बनता है या ईटा बनता है, उसको जली हुई मिट्टी मान सकते हैं?

उत्तर : हाँ ऐसा है ही है, ईटा का चूरा हो गया या धूलि हो गया सब कुछ, ये चीजों को ऐसा मानते हैं। नाभि मात्र निकाल कर देखने को बोले हैं ना, उसमें weight है। वो आचरण में आ भी सकता है। यदि आदमी को उसका फायदे से यदि लाभ उठाना है उस ओर ध्यान दिया जाना चाहिए। ठीक है? तो उसके बाद आता है, सुविधा को तो आप रखोगे ही, सुविधा के लिए ही तो घर बनता है। ठीक है। पहले की जो सुविधा की जो परिकल्पनाएं थी, जो सम्मिलित परिवार, ठीक है ना, तो उस समय में सोने, पढ़ने, शयन गृह, वो गृह, गृह को design करने की तरीका ही दूसरा थी, आज की स्थिति में दूसरा ही है। ठीक है। अंततोगत्वा कहाँ पहुँचते हैं, तो जो धरती की surface से नीचे के जगह में जो कुछ भी suggestion दिया है, उसको follow करने की कोशिश होना चाहिए। उसके बाद, आपको ये लिखा है कि नहीं, जगह को कोड़ करके उसमें filling के बारे मे आप पढे हो की नहीं?

प्रश्न : नहीं महाराज जी अभी तक जितने भी मैंने पढ़ा है, उसमें कहीं नहीं आया ये।

उत्तर : माने इसका मतलब है, अब वो उसको निकाल ही दिया, वो माने पूरा प्रबंध से ही निकल गए। ऐसा होगा इसका मतलब? पहले जो वास्तु शास्त्र के जो मूल ग्रंथों में इसको मैंने पढ़ा है। ठीक है, देवालयों में तो बहुत ज्यादा

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