बात सोचा गया। उसके आधार पर material को सोचा गया! भाई ऐसा होना होगा तो material क्या होगी? इसमे कैसा material लगाया जाए, ये सभी एक दूसरे के साथ अब mix-up होने लग गये। पहले जो ज्यादा से ज्यादा शिला का स्मारक स्थापत्य होती थी, शिला से संबंधित स्थापत्य, स्थापत्य का मतलब है वास्तु से ही है। तो वो जो शिला से संबधित जितने भी, माने ये बनता था आकार प्रकार, ऐसे शिला विधि से कम से कम क्षरण होना आप भी मानते रहे, हम भी मानते रहे, पहले भी मानते रहे, अभी भी मानते हैं। उसके बाद संयोग आया, वास्तु में ये परिवर्तित हुआ। मिट्टी से भी माने वास्तु को स्थापित करने वाली बात आई। और भी द्रव्यों से जैसा अभी cement है, चूना है, ईटा है, पत्थर है ये सब चीज़ है, सब आने लगी। आने लगी तो कुल मिलाकर के वास्तु का यदि एक वास्तविकता को व्यक्त करने की बात है ये, तो स्वास्थ्य पहले, वास्तविकता का मूल मुद्दे में स्वास्थ्य को पहचाना गया, स्वस्थ्य रह सके इस घर में रहकर।

स्वस्थ्य रहने के लिए उस घर की हवा का जो आवागमन कैसे हो सकती है, उजाले का आवागमन कैसे हो सकती है, सुविधाओं की स्थिति कैसे हो सकती है, 3 बात को ध्यान में लाया। ये तो हुआ घर के भीतर होने वाली सुविधाओं के बारे में। उसके बाद घर से जुड़ी हुई पानी किस दिशा में होना चाहिए? पाकग्रह, पाकशाला कहाँ होना चाहिए? शौचालय होगा तो किस दिशा में होना चाहिए? ये भी बातों को ध्यान दिया। ये ध्यान देने के बाद उसमे भी द्वन्द्व हो गया। तो पहले सोचा गया था नैऋत्य दिशा में शौचालय होना चाहिए, और उसका बिलकुल आपत्ति पैदा हुआ साब, नहीं यहाँ नहीं होना चाहिए। कहाँ होना चाहिए भई? कहा की वो आग्नेय दिशा में होना चाहिए, बिल्कुल against। वायव्य का against वही है ना?

नैऋत्य का against ईशान दिशा हो गया। एक व्यक्ति ने बोला नहीं भाई जो कुआँ, पानी की व्यवस्था उत्तर और पश्चिम के बीच की कोने में होना चाहिए। तो जैसा ही ऐसा बोला, दूसरा आदमी ने बोला, नहीं, आग्नेय दिशा में होना चाहिए। जल से आग पैदा हुआ है, जल जो है ना अग्नि दिशा में होना चाहिए बोले। तो इस प्रकार की वाद विवाद बहुत हुई। हाँ इसको हम अभी आज क्या करें वाला बात है। मुख्य बात यही है। इसको यदि हम ध्यान में लाते हैं तो यही निकलता है आज के स्थिति में, घर बनना चाहिए, घर में जो लगी हुई material कम से कम क्षरण होना चाहिए, बारम्बार repairing की नौबत नहीं आना चाहिए और आदमी को सुविधा पूरा होना चाहिए। क्या सुविधा पूरा होना चाहिए भाई? हवा, पानी, रोशनी ये सब चीज़ें और जो आने वाले आते हैं, बैठने वाले बैठते हैं, ये सभी चीज़ों के लिए ध्यान दे कर के ही अपने को ये वास्तु विद्या को विकसित करने की आवश्यकता है। अभी तक की जो traditional वास्तु है, वो काफी irksome हो चुका है। हर जगह में वो चलवे नहीं सकता, कई जगह कई बात को अपने को side track करना ही पड़ता है, ऐसा हो गया है। वो कैसे आ गई?

On Thick population problem के आधार पर। हाँ भाई एक घर के साथ एक घर सट गया। ये सब वास्तुशास्त्र को उस समय में सोचा गया था जिसमें एक घर बना हुआ है उसके चारों तरफ अच्छा मैदान है, इस विधि से शुरुआत किए हैं, वो अब जो है ना एक दीवाल से दूसरा दीवाल सटा है। ठीक है। तो इस प्रकार की स्थितियों में अभी हम वास्तु को यही सोचने की आवश्यकता है, जहाँ जो dense population है, वहाँ के लिये, वहाँ का सुविधा को ही ध्यान में लाना होगा और उसके साथ ये आवश्यक है जो हवा, पानी, उजाले की व्यवस्था को एक common rod के रूप में उसको प्रयोग करने की आवश्यकता है। पहले पानी के लिए कुआँ की बात थी, अब

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