प्रश्न : जैसा pyramid जो बने है, 1500 साल से 3000 साल लगभग पुराने हैं, अभी तक बिजली गिरने वाली कोई दुर्घटना, उनके ऊपर नहीं हुई?

उत्तर : वो प्रश्न ही नहीं है महाराज जी, बिजली के लिए पहले से भी बात ये सोचे गए थे, आप ने देखा होगा, बड़े-बड़े इमारतों में क्या किए हैं, एक ऊपर एक त्रिशूल जैसी एक चीज़ पहना देते हैं। वहाँ से ले कर धरती तक की वो rod बराबर आया रहता है। धरती तक वो rod को ला करके वो जितना उसका वो रहता है ना foundation, foundation से नीचे तक ले जा कर के छोड़े हैं। चौक मे जितने भी मंदिर का गोपुर बना हुआ है, गोपुर के ऊपर वो आकार दिखता है। उसको क्या किया है, उसको ला करके वो मंदिर का foundation जितना गहरा गया है, 10 foot, 20 foot, 50 foot उसके नीचे तक ले गए हैं।

ये प्रक्रिया किया है और कोई कोई ताम्बें को भी ले गया है। लोहा को अधिकांश ले गया है। ये मदुरा में एक मीनाक्षी मंदिर है, उसमें जो रखी हुई वो त्रिशुल, वो ताम्बे का रखा है। (मथुरा मे या मदुराई, मदुराई) वहाँ ले जा करके वहाँ प्रयोग किया है वैसा। ये सब विगत की बात हुई। अभी अपन क्या करेंगे, वाला बात वो कहते हैं, तो सुविधाजनक घर बनाया जाए अंतिम बात यही होता है dense population में। तो आप जहाँ चाहते हैं, वहाँ पानी भी नहीं हो सकती, ये हो सकता है, पाक गृह कहाँ हो, वो बात तो आप set कर सकते हैं, ठीक है ना, और शौचालय कहाँ हो ये बात set कर सकते हैं। ये भी आप नहीं कर सकते हैं कि जिस दिशा से घर के दरवाजा को बनाया जाए। दरवाजा जहाँ बनने की जगह है, वहीं बनाओगे, दूसरा कोई रास्ता भी नहीं है। छोटे-छोटे घरों में भला, बड़े घर होगा तो आप वो तो ऐसा मुहँ होगा तो यहाँ एक verandah निकाल दोगे, यहाँ से निकलो कहोगे, इतना भर कर सकते हैं हम। यही ना होगा, है ना?

प्रश्न : बाबाजी इसको कई बार अपन इसको प्रयोजनार्थ भी उपयोग में लाते हैं जैसे कई बार आर्थिक समस्या कुछ हो, तो हम दरवाजा पूरब से उत्तर कर दें, उत्तर से पश्चिम कर दें, तो इसमें फर्क आ जाता है। ऐसा मतलब अनुभव में भी आया है, तो मतलब कहीं ना कहीं ऊर्जाओं में फेर है, मतलब एक कोई सकारात्मक होगी, नकारात्मक होगी, जो भी ऊर्जा होगी।

उत्तर : ऐसा तो रहवै करेगा, इसमें दो राय नहीं है। तो वही हम बता रहे हैं ना, परिस्थिति बनती है ना भाई, छोटा घर है। हम एक जगह में गए थे। हमसे मिलने वाले हैं एक रस्तोगी जी, उनका total घर का चौड़ाई है वो 10 feet है, वो 80 feet लम्बी एक रेल्वे डब्बा है। एक दीवाल से एक दीवाल सटी हुई है। और केवल आगे खुला है, आकाश दिखता है, ठीक है, आकाश भी कहाँ दिखता है, सामने की घर दिखता है, पीछे खिड़की है। पीछे से देखने से शायद आकाश दिखता होगा,[नहीं ] नहीं दिखता है ना, उसमें भी घर ही दिखता है। ये ऐसी स्थिति बनी हुई है महाराज, अब उसमे कैसा घूमाओगे आप बताओं, ऊर्जा को कैसा घूमाओगे?

प्रश्न : बाबा जी, जो प्रचलित वास्तुशास्त्र है, उसमें जो भी ऊर्जा का सिद्धांत है, ऊर्जा आती है या ऊर्जा, ऊर्जा वस्तु के रूप में क्या है?

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