उसको बल दिया है। देवालयों को बनाने के संदर्भ में, उसके बिना देवालय बनाना नहीं चाहिए ऐसा लिखा है। तो खैर, अभी आपको जैसा भी लिखा हो, तो ये जगह को तो स्वच्छ बनाने के लिए तो आप भी किसी ना किसी प्रकार से सोचते ही हैं। स्थान शोधन के बारे में पहले बात है ही है।
और स्थान शोधन के बारे में जहाँ उपकार वाला बात होती है, उसको पहचानने के लिए, नहीं तो दिया जलाओ या नहीं तो हवा का रुख देखो, ये सभी चीज़ आपको बताए ही होंगे, उसमें कोई ना कोई चीज आप प्रयोग करोगे ही, करना भी चाहिए हमारे अनुसार। अच्छा वो शुभद लक्षण मिलने के पश्चात वो ऐसा ही सोचना चाहिए। उसके साथ ज्योतिषी को जोड़ दिया। इस राशि वालों के लिए इस प्रकार के आकार के घर में सोना चाहिए। माने उसको आय कहते रहे, हम लोगों के समय मे, आज भी कहते है? गजाय, सिंहाय, है, आय के बारे में कहा होगा। तो वो जो सामने कि घर किस आय में रहता है, उसके विरोधी ना हो ऐसा घर बनाओ, ऐसा पहले कहते रहे। अभी क्या कहते हैं? अभी ऐसा कुछ ज़िक्र करते हैं?
प्रश्न : नहीं इसको खतम कर दिया बाबा।
उत्तर : खतम कर दिया, ये इस प्रकार की बात होती है। परिवर्तन कैसा आया है देख लो महराज।
प्रश्न : इसका अर्थ क्या है, गजाय, सिंहाय?
उत्तर : वो क्या है ऐसा बता रहे हैं, जैसा - सिंहाय, तो उसका meaning जो है ना, physically हम meaning जो पाते रहे, आगे भाग चौड़ा है, पीछे भाग पतला, इसको सिंहाय कहते हैं। तो उसके बदले मे गजाय, उसके विपरीत, आगे भाग छोटा है, पीछे भाग बड़ा है, इसको ऐसा designing में ऐसा आता है। तो design में आने के पश्चात फिर मुख को, घर का मुहँ बनाते हैं, वो देखने पर ऐसा feeling होता है कि एक हाथी जैसा घर है ये। उसका मुख का मुद्रा को जो बनाते हैं, मुद्रा बनाने की विधि अभी भी होगा कहीं ना कहीं। वास्तु का मुख मुद्रा बनाने का जो विधियाँ हैं, उसमें वो भाव उभरती है। ये ठीक है ना? इस ढ़ंग से पहले विभिन्न प्रकार की आकृति के लिए suggestion दिया। पहले से आया हुआ बात है, जानवरों के आधार पर आकार के बारे में सोचा गया। ठीक है ये?
उसके बाद शनैः-शनैः वो बात धूमिल होती गई, धूमिल होते होते अपने सुविधा के अनुसार बनता गया। अब बनते बनते पहले के material के स्थान पर दूसरा material हो गयी। और पहले जितना एक फैली हुई संसार से सटी हुई संसार में आ गए, उस स्थिति में अपने को वास्तु को सोचने की आवश्यकता है। इसमें और एक प्रयोग करते रहे, घर की जो सुरक्षा, घर के वस्तुओं का सुरक्षा के बारे में, चुम्बकीय द्रव्यों को छत के तल में लेप करने की बात कही थी। अभी आपके पास मे आता है कि नहीं आता है? [नहीं आता है ] वो भी खतम। तो उसमें एक प्रयोग किए थे महाराज जी, एक पम्पापती नाम का एक जगह है, वहाँ एक structure थी, एक शंकर जी का मंदिर। उस मंदिर के सामने एक नंदी बनाने की अभ्यास थी, नंदी माने बैल का प्रतिमा, रखने की अभ्यास अभी भी है, पहले भी था। उस मंदिर में क्या कर दिया, वो नंदी कहाँ रखा है, वहाँ, एक चौकोर आयतन बनाया, उसको गहरे-गहरे 10, 5 step