खाते हैं। क्या करोगे। तो ये सोचने की मुद्दा है, यदि आम बनाना है वास्तु को, ये सब चीज़ों को ध्यान में लाना ही पड़ेगा। वास्तविक में मनुष्य में निहित है, शांति अशांति, वास्तु में निहित है? वास्तविक मनुष्य में संपदा, विपदा रखी हुई है या ये ईटा, पत्थर में रखा हुआ है?

इसको आपको decide करना पड़गा, इस पर आपको research करना चाहिए, मेरा सुझाव है। यदि research करना होगा तो वो funda हम clear करेंगे। मनुष्य में ही शांति अशांति की funda है, ईटा, पत्थर, धरती में नहीं है, हवा में नहीं है। कितना परिवर्तन हो गया है, पूरा funda उल्टा हो गया ना? वास्तु शास्त्र के सारा funda हैं ना, इसमे उलटा हो गया। वो वास्तु शास्त्र में ये बताना चाहते हैं यहाँ शांति से रहेंगे ऐसा वास्तु मे, वो कहते हैं ऐसे वास्तु में सब अशांत रहेंगे, ऐसा वो कहते हैं। जैसा ईटा, पत्थर सबको शांति को खिला रहा है! ये हँसी की जगह में आएंगे कि नहीं आएंगे? लिखा हुआ है भाई हम पढ़े हैं, वो सब कथा को हम सुने हैं और हमारे साथ में बहुत अच्छे जो वास्तु शिल्प, वास्तु शास्त्री जिए हैं उनके बातों को हम सुने हैं, सुनने की बावजूद आज की स्थिति में हमारा ये वक्तव्य है। ठीक समझ में आ गया ना?

तो शांति अशांति मनुष्य में निहित है और ईटा,पत्थर में नहीं है, धरती में नहीं है। मनुष्य इससे बढ़ गया है, आगे है। यही विकसित है, विकसित हो करके इससे आगे हो गया। जैसे कि पत्थर ईंटा से झाड आगे है कि नहीं है? झाड़ में दूसरे ही फल आता है। झाड में जो फल आता है, ईंटे से निकलता नहीं है। निकलता है? नहीं निकलेगा ना। वैसे ही मनुष्य से जो फल निकलता है इससे आगे की है, जीव जानवरों से आगे की है। वही चीज़ है शान्ति प्रियता, न्याय प्रियता, समाधान संपन्नता, सौभाग्य संपन्नता ये सब चीज़ फलन मनुष्य से निकलती है। किसके आधार पर? समझदारी के आधार पर। ये सब से प्रताड़ित काय को होता है? नासमझी के आधार पर। ये हमारा अंतिम निष्कर्ष है। जय हो मंगल हो कल्याण हो!

प्रश्न : बाबा, जैसे चुम्बकीय जो धारा है उत्तर, दक्षिण, ध्रुवों के बीच जो बहता है, वो तो प्रत्येक घर से भी बहेगा, घर कहीं भी बना हो, तो इसका उपयोग शरीर के स्वास्थ के लिए या रोग ना हो उसके लिए किस प्रकार से किया जा सकता है?

उत्तर : उसके बारे में बताया ना भाई, अभी इन्होंने बिल्कुल उसका उलटा बताया। चुम्बकीय धारा के बीच में, मानें चुम्बकीय धाराएँ चारों ओर से हो, वो उस वातावरण में मनुष्य ज्यादा सुरक्षित है, शरीर, मनुष्य सुरक्षित माने, शरीर सुरक्षित।

प्रश्न : बाबा आपने pyramid के बारे में बताया था उसमें चुयंबकीय, जबकि pyramid जो बनाये जाते थे उसमें कोई धातु उपयोग नहीं करते थे।

उत्तर : धातु का बात नहीं है बेटा, चुम्बकीय पत्थर भी होता है। आप क्यों याद नहीं रखते हो? पत्थर भी होता है। अंततोगतवा हम आपको बताए ना वो बैला वाला बात, अंत में वो स्वयं चुम्बकीय पत्थर है। और ऊपर जो लगाए थे वो सब चुम्बकीय पत्थर, नीचे लगाए थे वो भी चुम्बकीय पत्थर। वो proportion को जोड़ना वो कला की बात है।

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