तुम्हारे अनुसार? अभी अपन मंगल मैत्री से बात कर रहे हैं। मेरे अनुसार तो होता नहीं। वो दवाई से ही ठीक होगी। ठीक है। अब रह गया घर में रोग राटा को देखने के लिए यही प्रधान काम है, हवा, उजाला, ऊष्मा का संचार ये तीन। ये तीन के ऊपर तो काम है, मनुष्य की स्वास्थ्य ठीक रहना, नहीं रहना। स्वास्थ्य यदि बिगड़ता है तो उसको दवाई किए बिना, दरवाजा को बदल दिया तो स्वास्थ्य ठीक हो गया, ऐसा होता है?
प्रश्न : ऐसा देखने में तो आया है बाबाजी, मतलब एकदम तो नहीं, फिर भी देखने में एक हद तक तो आया है।
उत्तर : ये ठीक है, ये अभी जो कह रहे हो, उस बात को अपन सांत्वना लगाने की बात हो सकता है। सांत्वना में हमारा कोई भी शंका नहीं है। इस प्रकार की बात हम भी देखे हैं, किन्तु वास्तविक तत्व को कैसा पकड़ा जाए। हमने जो समझा है, हर जगह में आदमी स्वस्थ रहने का जो तरीका है, वो समझदारी है। मूल ऊर्जा वो ही है, मानव से जो उगलने वाला ऊर्जा यही है। वो नासमझी से झगड़ा होता है, रोग होता है, परेशानी होती है, तमाम प्रकार का झंझट होता है। ये आपकी consider में आता है कि नहीं आता है, ये हम नहीं जानते। आपके स्वयं के स्वीकृति में आ पाता है, नहीं आ पाता है, हम इसको पहचान नहीं पाते हैं। क्योंकि आप हम अभी इसके foundation में जा करके concept को, आप हमारा सामने concept को पहचाने नहीं है ना, है ना। मूलतः आपका concept, मेरा concept इन दोनों में कहीं ना कहीं तालमेल की आवश्यकता है। आवश्यकता है की नहीं है? एक दूसरे के communication के लिए, ये मेरा सोचना है।
प्रश्न : बाबाजी एक प्रश्न और है। पहले जो घर बनाए जाते थे वो इस तरीके से होते थे कि उनके जो दरवाजे हैं करीब-करीब आपस में मिलते रहें। एक घर में जैसे कई कमरे हों, एक कमरे में क्या हो रहा है, दूसरे कमरे को थोड़ी बहुत जानकारी रहे। लेकिन आजकल जो नए ऐसा मकान बनाते हैं कि एक का मुंह ऐसी दिशा में हो दूसरे का ऐसी दिशा मे हो कि एक कमरे वाले को दूसरे कमरे के बारे में कोई खबर ही ना रहे। मतलब एकदम कमरे में भी रहें और बिल्कुल घर से अलग भी रहें। घर को दो प्रकार से बनाया जाता था, कि आदमी यदि कमरे में है, 3,4 कमरे बने हैं, 3,4 कमरे में आपस में क्या हो रहा है ये एक कमरे वाले को पता होता है, ये घर का मतलब है और अभी जो घर का मतलब है दूसरे कमरे मे क्या हो रहा है पता नहीं चले। privacy पूरी maintain होते रहे और घर में हैं ये बोलने को भी हो जाए, और घर वालों से कटे भी रहें। पहले privacy नाम की चीज़ नहीं होती थी, घर में हैं मतलब एक कमरे में बंद हैं तो भी पूरे घर से जुड़ा हुए हैं। इस ढंग से मकान पहले बनते थे, तो कौनसा ठीक है और उसके पीछे क्या कारण है?
उत्तर : इसका उत्तर ये होता है, एक दूसरे को communicate होने वाली structure ज्यादा favorable है, safety है और उसमें मनुष्य को ज्यादा आश्वस्त रहने की विधि है। आगे और एक इससे जुड़ी हुई और हो जाए, आप कुछ कहना चाहते हैं?
प्रश्न : वास्तु शास्त्र की मानव जीवन में उपयोगिता या भागीदारी कहाँ तक है?
उत्तर : वास्तुशास्त्र के साथ केवल यही है बाबा, मानव जीवन की उपयोगिता का बारे में आप पूछते हो, शरीर संरक्षण के लिए है वास्तु। शरीर को संरक्षित करना है, जीवन जागृति को प्रमाणित करना है, ये कुल मिलाकर के उद्देश्य है।