समझ में आता है। किन्तु मूलतः ऊर्जा संचार उत्तर, दक्षिण विधि से ही है। वो magnetic rod ही है। वो magnetic force ही निरंतर सब जगह में available होता रहता है। ठीक है, गलत है?
प्रश्न : बाबा मतलब ऐसा कोई ऊर्जा नहीं बन रही है, जो मनुष्य के विचारों को परिवर्तित कर दे, ऊर्जा के रूप में। जैसे रोशनी से गर्मी से परेशान होगा, रात को रोशनी रहेगी तो बहुत ज़्यादा परेशान होना। ये अलग बात हो गई, और कुछ होता है क्या?
उत्तर : देखो वो हो गया, अब traditionally जितना सोच सकते हैं ये ही blend करके आप जो निकालना है निकाल लीजिए। तो मनुष्य में ऊर्जा संचार समझदारी के आधार पर है। ठीक है, ये आपका वास्तुशास्त्र से bifurcate हुआ ये। आपको point समझ में आया ना? माने ये reference point ये है। मनुष्य का समझदारी ही मनुष्य से उगलने वाली ऊर्जा है। एक भी मनुष्य को आप नहीं पाओगे कि समझदारी विहीन हो। ठीक हे। ये ऊर्जा संचार हर व्यक्ति से उगलती है। उसमें coordination के बारे में आते हैं, समझदारी की मुद्दे पर ही एक दूसरे के साथ coordination है। नासमझी से non coordination, नासमझी बराबर non coordination, उसका projection है कलह, उसका projection है दुख, उसका projection है आलस्य प्रमाद, बेवकुफी फलस्वरूप दरिद्रता। ऐसा आता है ये record।
उसको यदि record करने जाएंगे तो ऐसा आएगी। अभी सर्वाधिक लोग यही सोचते हैं कि ये घर ठीक नहीं है, क्योंकि वहाँ कलह होता रहता है, घर ठीक नहीं है, शांति नहीं रहता है, घर ठीक नहीं है, पनपते नहीं हैं, घर ठीक नहीं है, स्वास्थ्य ठीक नहीं रहता है, घर ठीक नहीं है, हाथ में जो कुछ भी आता है वो टिकता ही नहीं है, ये ऐसा लोकोक्ति को सुनने में आती है। सही है ये ? गलत है? सही है ना? अच्छा ये क्या है, ऊर्जा का असंतुलन है। क्या ऊर्जा का असंतुलन भाई? मनुष्य की समझदारी नाम की ऊर्जा है, उसमें असंतुलन। आपका समझदारी से मेरे समझदारी के छत्तीस का आकड़ा है, झगड़ा नहीं करेगें तो क्या करेंगे? पूरा हो गया?
प्रश्न : बाबाजी इसमें ऐसा है के अपन वास्तुशास्त्र से जो मकान बने है उसमे generally देखने में आता है, लड़ाई झगड़ा, वास्तुशास्त्र के अनुसार परिवर्तन करने के बाद इसमें परिवर्तन आ जाता है मतलब, थोड़ा शांति आ जाती है सुख की जो चीजें होना चाहिए। तो मतलब है की ये समझदारी वाले ऊर्जा को प्रभावित करने की क्षमता रखता है क्या?
उत्तर : देखो बेटा, इसमे ऐसा अपन एक तुकबंदी वाला बात करना हो तो बहुत कुछ है।
प्रश्न : नहीं बाबाजी देखने मे भी है मतलब मेरा ये practical experience है कि जहाँ काफी लड़ाई झगड़े होते थे हमनें परिवर्तन किया वहाँ पर और काफी शांति या गई, आपस में काफी उनमें सामंजस्य आ गया, सोचने की दिशा बदल गई।
उत्तर : सोचने की दिशा कैसे आता है, आपका कथन के अनुसार? जैसा एक सोचने की बात है, एक आदमी को टी.बी. हो गयी है घर मे, उससे सभी परेशान हैं ही हैं। वो दिशा परिवर्तित करने से क्या वो टी.बी. ठीक हो गया,