प्रश्न : श्रम, गति, परिणाम को भी थोड़ा बता दीजिए?
उत्तर : देखो बेटा पुनः वहीं आते हैं, ऊर्जा सम्पन्नता की जगह में। ऊर्जा सम्पन्नता कैसे है? क्योंकि सत्ता पारगामी है। सत्ता को रोकने वाले, सत्ता को arrest करने वाले, सत्ता को अवरोध करनेवाली, वस्तु इस धरती पर एक भी नहीं है। पहले उस सत्य को अपने में अवधारणा में लाना पड़ेगा। ये आने के बाद क्या हो गया? हर वस्तु एक-एक है। एक-एक होने का क्या व्याख्या है? उसके सभी और सत्ता है, सत्ता में ड़ूबा ही है हर एक एक, दो चीज़ हो गई। प्रत्येक एक की सभी और सत्ता का होना ही सीमा है, सीमा का और कोई मतलब नहीं है। दूसरा बात क्या है? हर एक वस्तु सीमित रूप में रचित रहना, दूसरा व्याख्या ये बनता है। कितना लम्बा, चौड़ाई में रचित हो गया, एक ये व्याख्या है, दूसरा व्याख्या रचित है, इसका पहचान क्या है? उसके सभी ओर सत्ता का होना ही है, सभी ओर सत्ता होना ही एक का नियंत्रण रेखा है।