उत्तर : ऊर्जा वस्तु के रूप में यही है, ग्राही और जो संप्रेषणी तत्व को पहचानने की बात है। कहाँ से संप्रेषणा होता है, कहाँ ग्रहण होता है। हवा पहले, कहाँ से आता है, कहाँ से जाता है। एक हवा का संचार तो पहचाना जा सकता है ना? ठीक है, बाकी ऊर्जा को कैसा पहचाना जाए? बाकी ऊर्जा को पहचानने का एक ही विधि आप हमारे पास है कि उत्तरी ध्रुव, दक्षिणी ध्रुव के सिधान में। दिग सूची नाम की एक चीज़ आती है, उसके अनुसार ऊर्जा का प्रवाह कहाँ है उसको आप पहचान सकते हैं। जिसको अपन सोचते हैं ना उत्तर की ओर सिर मत करो।
प्रश्न : बाबाजी आप जो कह रहे हैं, कोई दूसरी प्रकार की ऊर्जा के बारे में कह रहे हैं, ये जो जैसे आपने जो बताया चुंबकीय बल रेखाओं के आधार पर चुंबकीय ऊर्जा का ज्ञान होता है उत्तर दक्षिण जो ध्रुव हैं उनके आधार पर होता है। एक जो है अपन सूर्य के आधार पर करते हैं।
उत्तर : वही उजाले की बात हो गई ना भाई वो। उजाले की बात जो बताते हैं, उसको तो ध्यान रखना ही है। घर के अंदर सूर्य रश्मि सीधा आना चाहिए। नहीं आना चाहिए?
प्रश्न : बाबाजी जैसे सूर्य जैसे पूर्व दिशा में सीधी आती हैं किरणें तो उसका अलग प्रभाव होता है, पश्चिम से आती हैं तो अलग प्रभाव होता है, जबकि सूर्य एक है। तो ऊर्जा में कहाँ अंतर आ गया?
उत्तर : वो ऐसा अपन कहते हैं, उसका प्रमाण क्या प्रस्तुत किया जाए? प्रमाण यही है, सामने की जो द्रव्य राशि है, परिस्थिति है, सामने दुकान रहेगा, मकान रहेगा, गंदगी रहेगा। उसके ऊपर से गुजरता हुआ उजाला, हवा के साथ ही जाएगी या radiation जाता है, मान लो, आज की आप की भाषा के अनुसार। ठीक है, वो radiation को ना गंदा लगता है, ना धूआँ लगता है, कुछ नहीं लगता। इन सब से चीर फाड़ करके जाने वाली चीज़ को हम radiation कहते हैं। अभी जो x -ray लेते हो, radiation ही ना उसको ले पाता है। विकिरणीय की रोशनी में ही वो हड्डी का picture आता है ना। और उसमे कौन सा कहाँ से, इधर से करने पर व्यतिरेक होता है उधर से करने पर व्यतिरेक होता है, ऐसा कुछ तो देखा नहीं गया। ठीक है। फिर भी हमारा सोचना ऐसा है, हवा के साथ रोशनी blend रहता है ऐसा मान लिया जाए, ठीक। और इसके हवा के साथ सूर्य रश्मि का जो कुछ भी ताकत भीतर पहुँचाता है ऊष्मा के रूप में, अंततोगत्वा उष्मा के रूप में ही पहुँचेगा, scientifically, logically दोनों विधि से यही निकलता है। उसके बारे में सोचने की बात, इधर से उष्मा भीतर घुसना, शुभद है, उधर से घुसना शुभद है, और उसको सोचने की बात है। उसके लिए सामने की परिस्थितियों को consider करने की आवश्यकता है, यही मुख्य मुद्दा बनाता है। इसमे हम पार पा सकते हैं।
प्रश्न : बाबाजी, जो भौतिक ऊर्जाएं मानी जा रही हैं आजकल, जैसे प्रकाश है, ताप है, ध्वनि है, या चुम्बकत्व है, गंध है, इन चीज़ो के अलावा और कोई दूसरे प्रकार का ऊर्जा नहीं बनती? दरवाजा को घूमाने से या कुछ और करने से?
उत्तर : हमको जो समझ में आया है, मूलतः ऊर्जा का जो है, ऊर्जा संचार उत्तर दक्षिण से ही संबंधित है। हमारा समझ के अनुसार ऊर्जा संचार उत्तर दक्षिण से ही है, magnetic pole से ही है। ये secondary है, ये जो सूर्य के बारे में कहते हो, उसके बाद हवा के बारे में कहेंगे, ये सब चीज़ें ठीक हैं। ये सब consider करने वाला बात तो हमको