विरोधाभास है। हजारों रूपया हम जहाँ चाहते हैं, हमारा चाहत जहाँ बना रहता है, हमारा मन जहाँ लगा रहता है, वहाँ हजारों रूपया लूटा देते हैं। दो रूपया हमसे छीनने आते हैं, तो जान लेने के लिए, जान गवाने के लिए तैयार हो जाते हैं। ये सब चीज़ें एक मानव प्रवृत्ति में देखा हुआ बातें हैं ये। इस ढंग से जो बल पूर्वक, छल पूर्वक जो धनार्जन करते हैं, उसको राजयोग बताने का बात से हम सहमत नहीं हो पाए। ठीक है?

इस ढंग से ब्रह्मांडीय किरणों की सहायता से, धरती के अक्षांश-रेखांश के वर्ग में क्या प्रभाव पड़ता है, इसको पहचानने की बात, उसके आधार पर मनुष्य शरीर पर क्या प्रभाव पड़ता है, उस को गणना करने की बात, शरीर के आधार पर मन को परिकल्पना देने की बात और जो पूर्व पुण्य योग एक बताते हैं, कैसे पृष्ठभूमि से वो शिशु पैदा हुआ रहता है, उस पृष्ठभूमि को पूर्व पुण्य योग बताते हैं, उस पूर्व पुण्य योग के आधार पर उनका भविष्य फल बताने के लिए प्रयत्न है।

राजा का घर में एक लड़का पैदा होता है, राजयोगी होगा ही, इस ढंग की सोचा गया। कोई-कोई दरिद्र योग में भी पैदा होते हैं, ये भी हुआ है। और कोई-कोई ऐसे हुए हैं - राजा का घर में पैदा नहीं हुए हैं, उनको भी राजयोग आ गया है, उनको राज्य मिल गया है – ऐसा भी कथाएँ बनी हुई हैं, है ना? वो राजा के सिंहद्वार में सबेरे पाँच बजे पहुँच गया, उनको पकड़ लाओ हमारा लड़की को शादी कर देते हैं, उनको राज्य मिल गया। ख़तम हो गया, राजयोग हो गया। ऐसी बातों को लिखा हुआ है परिकथाओं में। ठीक है? ये सबको हम सुने हैं। ये सुनने के बाद भी, जो उसमें अधिकांश भाग है, ये छल बल के साथ ही धनार्जन, देश का अर्जन, यश का अर्जन, ये सब जुड़ी हुई है - राजयोग में। ये कोई अच्छी बात नहीं है, ज्योतिषी की ज़िन्दगी के लिए, ये ख्यातशील बात नहीं है। ये हमारा सोचने की तरीका है। अभी इसमें ये नहीं है, हमारा कोई आग्रह भी नहीं है, इसको सभी कोई मानना ही है, ऐसा नहीं है। मेरा मंतव्य ही यही है।

प्रश्न : आपकी बात मानवीयता के ढंग से सही है बाबा। लेकिन इससे जुड़ा हुआ जो दूसरा सवाल है, कि बहुत सारे ग्रह नक्षत्रों के प्रभाव की वजह से, जैसा ज्योतिष शास्त्र में गणित है, मनुष्य को सांसारिक जीवन में ढेर सारे सुखों और दुखों को भोगने की स्थिति आती है। दुखों से बचने की मनुष्य की आकांक्षा तो स्वाभाविक है। तो उसके लिए जो उपाय बताए गए हैं और जो ग्रहों का - मंगल का, बुध का, सूर्य का - किसी बीमारी के रूप में, दुख के रूप में, मृत्यु के रूप में जो असर पड़ेगा। उसमें बहुत सारी बातें सही उतरती देखी गई हैं, तो उनका एक करोड़ों मील दूर किसी ग्रह या नक्षत्र के प्रभाव से, एक व्यक्ति के जीवन में कोई घटना घटित हो, जिसकी सालों साल पहले घोषणा की जा सके, कोई सुनिश्चित विज्ञान होगा। वो किस तरह से काम करता है, और उस से बचने के लिए जो उपायों की चर्चा की गई है, उसको हम लोगों ने थोड़ा बहुत अनुभव भी किया। वो उपाय कहाँ तक कारगर है.? उन उपायों को और कारगर बनाने के लिए हमारी कोशिश क्या होना चाहिए?

उत्तर : उसके लिए और एक हमारा observation - ये निरीक्षण परीक्षण की बात है। मानव इतिहास के अनुसार हमारे यहाँ भविष्यवाणी का दो ही बात हैं - सुफल और दुष्फल - अनिष्टफल, इष्टफल। इष्टफल में वो ही माना गया है – लाभ, धन प्राप्ति, पद प्राप्ति, यश प्राप्ति, स्वास्थ्य प्राप्ति, अच्छे भार्या की प्राप्ति, बच्चों की प्राप्ति - जो आज तक देखा गया है, वो ही चीज़ें बनी हुई हैं। इन प्राप्तियों के क्रम में जो एक हज़ार वर्ष पहले, मनुष्य के साथ जितना दुर्घटनाएँ

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