ये सब बात, हमारा गति की चलते, जिस प्रकार की गति में हमारा व्यतिरेक बनता है, किस प्रकार की हमारा गति में जो परेशानियाँ निर्मित होते हैं, उसको सोचने की बात आती है। उसको यदि हम सोचने जाते हैं, ये पता लगता है, उस उसका एक परिस्थिति बनती है। जैसा जो aeroplane से गिरने की, aeroplane fail होना होगा, नहीं तो काहे को गिरेगा आदमी। तो यंत्र ही fail हो गया तो आदमी गिरेवे ना करेगा। इसको अपने को अच्छी तरह से समझना चाहिए। अब क्या हो गई? यंत्र के ऊपर आ गया ज्योतिष। यंत्र ठीक चलेगा की नहीं, अब वहाँ पहुँच गए। अब मनुष्य का ज्योतिष तो fail हो गई, यंत्र का ज्योतिष प्रबल हो गई।
प्रश्न : जब हवाई जहाज उड़ातें हैं, तब पूरा check करके जब ok हो जता है। जहाँ तक यात्रा में जाना है, वहाँ तक की यात्रा में ये ठीक चलेगा। ऐसा स्वीकारने के बाद ही हवाई जहाज को रवाना करते हैं, उसके बावजूद भी crash होता है। रोज तो होता नहीं, कभी-कभी हो जाता है। हो जाता है इतना ही नहीं ऐसा होगा करके बहुत लोग पूर्व में भविष्यवाणी कर दिये थें, और सचमुच वो घटना के रूप में घटित हो गया। जबकि mechanically इस तरह से कोई पकड़ या इस तरह से कोई भविष्यवाणियाँ नहीं थीं, engineer लोग उस बात को पकड़ नहीं पाए थे, ज्योतिषी ने पकड़ा था और वो बात सही उतरी।
उत्तर : ठीक है, ये मान लिया गया, ये सब बातों को अनुभव भी किया गया है कई स्थितियों में, क्योंकि ज्योतिष के ऊपर हम जितना काम किया, उसमें ये सब बातें परिकल्पना में हमारा आता है। ये सब बात घटित भी हो सकता है, इसमें हमको कोई शंका नहीं है। किंतु कुल मिलाकर के भविष्यवाणी कहाँ गया? यंत्र के आधार पर चला गया। ये तो बात होता ही नहीं है, जो अभी train accident हुआ, उतने लोगों को एक साथ कोई मृत्यु योग का परिस्थिति बनता नहीं, आप आजमा करके देख लीजिए। आदमी की बेवकूफी से, यंत्र की गलती से, ये घटना घट सकती है। इसमें क्या हुई? किसी एक आदमी के कारण से सब आदमी मर गए। वो एक आदमी की गलती सबको ले जाने वाला योग आ गया। ऐसा बनता है। सही बात तो यही बनता है। उसको अपन, इतने लोगों को उसमें जितने भी थे, अभी हज़ार आदमी मर गए, मान लीजिए, उस मुहूर्त में मृत्यु योग सबका एक साथ बनता नहीं। आप प्रयोग करके देख लीजिए। अभी युद्व में जो आदमी मर गए, उतने लोगों का उस समय में मृत्यु योग रहता नहीं। भूकंप में कहाँ मृत्यु योग रहता है? धरती धँस गई, धरती धँस करके यहाँ तालाब हो गया, यही जगह, मान लो। इसमें मृत्यु योग क्या करेगा? धरती का योग काम करेगा। हमारा कहने का मतलब यहाँ है। तो यंत्रों की रचयिता, यंत्रों का जो जातक है, उसको हम को पहचानना पड़ेगा।
प्रश्न : मूल प्रश्न तो बाबाजी छूट रहा है कि, इस तरह से ब्रह्माण्डीय किरणों का शरीर को प्रभावित करने की प्रक्रिया क्या है?
उत्तर : बता तो दिया ना भाई, ये तो मनुष्य के साथ है ये, ब्रह्माण्डीय किरणों का। अभी आपको बता दिया। अभी हम आपको अंगुली न्यास किया - एक आदमी गलती करता है, उससे हजार आदमी मरेगा – ऐसा भविष्यवाणी करिए। वो एक आदमी को यदि भविष्यवाणी कर पाते हैं, pointedly, उस स्थिति में उस आदमी से बचा जा सकता है।
प्रश्न : अभी अपन उपाय की चर्चा नहीं कर रहे बाबाजी, ब्रह्माण्डीय किरणों के द्वारा घटनाओं के घटने का प्रक्रिया क्या है?