उत्तर : अभी क्या बताया, ब्रह्माण्डीय किरण बहता रहता है, प्रभावित करता रहता है और सकारात्मक, नाकारात्मक घटनाओं को घटाता रहता है।समय calculation की मूल पूँजी जो हमने बताया ना, धरती में दो प्रकार की रेखा खींचा जाता है। एक अक्षांश रेखा, एक देशांतर रेखा। एक गोल-गोल रेखा, एक उत्तर ध्रुव, दक्षिण ध्रुव की रेखा। इसको खींचने पर अपने को छोटे से छोटे और बड़े से बडे़ वर्ग मिलते हैं। उन-उन वर्ग पर इन ब्रह्माण्डीय किरणों का प्रभाव, जो बुध ग्रह के द्वारा कैसा प्रभाव होता है, और मंगल ग्रह के द्वारा कैसा प्रभाव होता है, उसको हम पहचाना है। यही ग्रहों को पहचानने का मतलब है। इसको पहले ध्रुवीकरण करिए। ये बहुत ही साधारण बात है, इतने को पहचाना ही जाता है। मैं समझता हूँ, इसके लिए बहुत पसीना गवाना नहीं है। इस मुहूर्त में शनि से जो reflect हो करके जो ब्रह्माण्डीय किरण आते हैं, उसका क्या प्रभाव पडे़गा, उसका कुछ निरीक्षण, परीक्षण भी किए हैं, कुछ परिकल्पनाएँ बनी भी है, और भी आगे परिकल्पनाएँ निरीक्षण होता रहेगा, ये प्रक्रिया चालू है। ठीक है?
प्रश्न : जिस तरह का प्रभाव एक ग्रह के द्वारा होता है पैदा, उस तरह के प्रभाव के लिए क्या चीज़ जिम्मेदार है?
उत्तर : जिम्मेदार जो है, मनुष्य, वो स्थली जो आक्षांश-रेखांश का वर्ग बताया वो स्थली, जो प्रभाव जिस ग्रहों के द्वारा आई वो मुहूर्त। ये स्थल, समय और उसका resource, ब्रह्माण्डीय किरणों का resource - इन तीनों मिल करके घटना घटती है। इन तीनों को पहचानना ही ज्योतिषशास्त्र का महत्वपूर्ण भूमिका है। जो कुछ भी महिमा कहो, यही ज्योतिषशास्त्र में हम लोग पहचानते हैं, इसी विधि से भविष्यवाणी होते ही है। इस समय में शनि का प्रभाव इस प्रकार से है, शनि का रुख़ पहचानने की विधि अलग है, शनि स्वस्थ है, अस्वस्थ है, रोग ग्रस्थ है, ग्रहण ग्रस्त है, परेशान है और ख़ुशहाली है, वो सबको पहचानने की विधियाँ है। इन विधि के आधार पर ख़ुशहाली के समय में वो क्या कर देता है शनि, वो ही ख़ुशहाली के समय में बृहस्पति क्या कर डालेगा, वो ही चीज़ मंगल ख़ुशहाली के समय में क्या कर डालेगा? इसको हम पहचानते ही हैं, इसमें कोई शंकाएं नहीं हैं। इसको पहचानने के बाद वो स्थान, वो समय को निर्धारित करते हैं, उस समय में उसके अनुसार फल क्या होता है, उसको हम देखते हैं। वो फल को बारम्बार हम observe किए रहते हैं। उसका सर्वेक्षण हमारे पास रहता है, उसके आधार पर फलश्रुति को आगे बदल करके या यथावत फलश्रुति करने की अभ्यास बना के रखे हैं। इसी ढंग से तो ज्योतिष चल रहा है।
प्रश्न : इस बात को बाबा एक ऐतिहासिक उदाहरण से समझेगें। जैसे- Nostradamus ने सन् 1553 में एक किताब लिखी, Hitler के Germany में तानाशाह के रूप में आने की और सारे दुनिया में एक युद्ध का तहलका मचाने की भविष्यवाणी उसने 450 साल पहले कर दी थी। वास्तव में आधा अक्षर की कमी से उसने हिस्टर नाम दिया था, बाद में हिटलर, अडोल्फ़ करके ऐसा नाम हुआ। तो जो आप बोलते हैं, कि एक आदमी को अगर रोका जा सके, दुर्घटनाएँ रूक सकती हैं। हिटलर को सत्ता में आने से रोकने के लिए वहाँ के राष्ट्रपति, वहाँ के जनता, अंतर्राष्ट्रीय, कम्युनिष्ट आंदोलन, Russia, सभी लोगों ने कोशिश की थीं, उसके बावजूद वो आदमी सत्ता में आ गया। और उस समय Germany बहुत कमज़ोर था, first world war के परिणामों के चलते। उसके बावजूद उसने Germany को उस समय का सबसे ताकतवर देश बनाया, दुनिया को रौंद दिया और लगभग 10 करोड़ आदमियों का मौत की घटना घटी। तो ऐसा एक मानवीय प्रयास होते हुए भी, जो घटना अभी घटी नहीं हैं, जिसका कोई संभावना तक नहीं है, 450 साल पहले उसने घोषणा भी कर दी। इस तरह के सैकड़ों उदाहरण हमारे पास हैं। मानवीय प्रयास के बावजूद हिटलर के घटना का रूक जाना संभव नहीं हुआ, भविष्यवाणी घटित हुआ।