प्रबुद्धता को सर्वसुलभ बनाने वाली शिक्षा एवं व्यवस्था पद्धति से होता है। प्रबुद्धता मानवीयता पूर्ण व्यवहार रूप में स्पष्ट होती है। इसकी चरितार्थता अर्थात् सर्वसुलभता ही सर्वमंगल नित्य शुभ है।
“विधि विहित जीवनयापनाधिकार ही प्रत्येक मानव का मौलिक अधिकार है।” मौलिकता से परिपूर्णता ही मौलिक अधिकार है। मानव में मानवीयता पूर्ण क्षमता ही मौलिकता है। मौलिकता विहीन मानव अर्थ विहीन है। अर्थ विहीनता ही अपूर्णता है। अपूर्णता ही उसके क्रियाकलाप एवं व्यवहार में न्यूनता है। जो लोप और दोष के रूप में परिलक्षित हैं। कार्यकलाप एवं व्यवहार में न्यूनता ही अजागृति का द्योतक है। अजागृति, जागृति के लिए बाध्य है ही। प्रत्येक अजागृत इकाई जागृति के अर्थ में ही अपने को समर्पित करने के लिए बाध्य है। यही उनमें गुणात्मक परिवर्तन की संभावना है। मानव में अर्थवत्ता की स्थापना, प्रबोधन पूर्वक प्रकटन क्षमता को प्रदान करना ही शिक्षा प्रणाली पद्धति एवं नीति में पूर्णता का प्रत्यक्षीकरण है। प्रत्येक मानव प्रबुद्ध होने में, से, के लिए अजस्र प्रयासी है। मानव के मौलिक अधिकार का प्रयोग व्यक्ति के आचरण एवं व्यवहार, परिवार के सहयोग एवं सहकार, समाज के प्रबोधन एवं प्रोत्साहन, राष्ट्र के संरक्षण एवं संवर्धन तथा अंतर्राष्ट्र में उसके अनुकूल स्थिति परिस्थिति के लिए किया गया कार्यक्रम है। संस्कृति, सभ्यता, विधि एवं व्यवस्था की एकात्मता ही अंतर्राष्ट्र में अनुकूल स्थिति परिस्थिति है। मानवीयता को संरक्षण एवं संवर्धनदायी विधि व्यवस्था उसके व्यवहारान्वयन योग्य व्यवस्था पद्धति एवं नीति ही अखण्ड सामाजिकता का संरक्षण एवं संवर्धनकारी तत्व है। मानवीयतापूर्ण संस्कृति सभ्यता का प्रचार, प्रदर्शन, प्रकाशन, गोष्ठी, संगोष्ठी, आख्यान, स्पष्टीकरण एवं समीक्षात्मक कार्यकलाप ही समाज का प्रबोधन एवं प्रोत्साहन सर्वस्व है। परिवार में चारित्रिक एवं नैतिक कार्यक्रम में दृढ़ता, विश्वास एवं अवगाहन क्षमता ही व्यक्ति के आचरण एवं व्यवहार में सहयोगिता एवं सहकारिता है, जो स्पष्ट है। यही मानव जीवन चरितार्थता का स्पष्ट एवं प्रत्यक्ष रूप है। यही जीवन चरितार्थता भी है। यही मानव के मौलिक अधिकार तथा उसकी उपयोगिता, उपादेयता एवं उपलब्धि है। मौलिक अधिकार का अनुष्ठान ही स्वतंत्रता का लक्षण है। इसका पालन, अनुसरण एवं अनुशीलन ही स्वतंत्रता का द्योतक है। इसी मौलिक अधिकार में स्वत्व सिद्धि होती है। यही राष्ट्र में अखण्डता एवं प्रभुसत्ता, समाज में सहअस्तित्व, परिवार में सहकारिता एवं व्यक्ति में मौलिक अधिकार का आचरण है।