“सर्वमंगलमयता प्रेमानुभूति में ही है।” बौद्धिक समाधान एवं भौतिक समृद्धि ही सर्वमंगलमयता का प्रत्यक्ष रूप है। प्रेमानुभूति में अपव्ययता की संभावना नहीं है। मानवीयता में संक्रमण ही अपव्यय का तिरोभाव है। मानव जीवन चरितार्थता सर्वमंगलमयता में ही है।
“संपूर्ण योगाभ्यास की चरमोपलब्धि भी प्रेमानुभूति ही है।” सत्य चिन्तन से भी प्रेमानुभूति होती है। प्रेमानुभूति व्यवहारिक एवं सामाजिक है। प्रेमानुभूति योग्य क्षमता अमानवीयता में व्यवहारिक नहीं है। अमानवीयता सामाजिक नहीं है इसलिए व्यवहारिक नहीं है। साथ ही मानवीयतापूर्ण जीवन में अमानवीयता संभव नहीं है।
“प्रेमानुभूति योग्य क्षमता सम्पन्न होने के लिए शुचिता एवं गुणात्मक परिवर्तन में अनुशीलन अनिवार्य साधना है।” सम्यकता की ओर गतिशीलता अर्थात् गुणात्मक परिवर्तन हेतु सुनिश्चित आचरण, व्यवहार एवं अर्थ का सदुपयोग ही साधना और अभ्यास है। शारीरिक स्वस्थता एवं शिष्टता का योगफल ही शुचिता है। प्रमाण परंपरा में अनुगमन ही अनुशीलन है। जीवन ही “प्रमाण त्रय” का प्रतिपादक है। प्रमाण ही जागृत मानव परंपरा है।
“मानव के चारों आयामों का पूर्ण जागृति ही प्रेमानुभूति योग्य क्षमता है।” यही ऐतिहासिक उपलब्धि मानव में प्रतीक्षित है। ऐसी क्षमता से सम्पन्न व्यक्तियों के योग्य कार्यक्रम ही अभ्युदय है। वह धार्मिक, आर्थिक एवं राज्यनैतिक कार्यक्रम ही है। ऐसे कार्यक्रम में निपुणता, कुशलता सहित मानव जीवन दर्शन की शिक्षा जो पाण्डित्य है उसका समावेश होना ही प्रेमानुभूति योग्य क्षमता का सर्वसुलभ होना है। यही सर्वमंगल कार्यक्रम है।
“प्रेमानुभूति सम्पन्न जनमानस को उज्जवल करने के लिए शिक्षा की भूमिका अति महत्वपूर्ण है।” शिक्षा ही विश्लेषण पूर्वक वास्तविकताओं पर आधारित जीवन के कार्यक्रम को स्पष्ट करती है। यही प्रत्येक मानव में पायी जाने वाली कामना एवं उसकी आवश्यकता है। यही शिक्षा का दायित्व है, जिसके बिना मानव में अनुभव योग्य क्षमता का जागृत होना संभव नहीं है। शिक्षा व व्यवस्था ही जीवन में गुणात्मक परिवर्तन का स्रोत है। अंततोगत्वा यही अनुभव के लिए प्रेरणा है। वरिष्ठ अनुभूति प्रेमानुभूति ही है। यही पूर्णतया सामाजिक एवं व्यवहारिक है।
“उपदेश, स्मरण, कीर्तन, संकीर्तन की चरितार्थता भी प्रेमानुभूति में ही है।” पूर्णता से सम्पन्न जीवन की आकाँक्षा मानव में प्रसिद्ध है। उसके योग्य वातावरण निर्माण करना ही सामाजिक कार्यक्रम है। यही सर्वमंगल कार्यक्रम है। यही समाधान, विश्राम एवं स्वर्ग है।