उत्तर : हम इसके बारे में जो परिवार मूलक स्वराज व्यवस्था में इसका पूरा सूत्र लिखा है। व्याख्या का स्वरूप समाधानात्मक भौतिकवाद में भी आया है, आवर्तनशील अर्थशास्त्र में आता ही है। इसका सामान्य सूत्र अभी अपन एक दूसरे को समझने के लिए इतना किया ही जा सकता है, एक गाँव में ज्यादा से ज्यादा 4 परिस्थिति, 6 परिस्थिति, 10 परिस्थितियाँ होती हैं कोई फसल उत्पादन करने के लिए, जैसा चना उत्पादन करना है। चना उत्पादन करने के लिए एक गाँव में 4 परिस्थितियाँ हो सकता है, एक जगह में ज्यादा हो सकता है, एक जगह में कम हो सकता है, ऐसे परिस्थितियाँ होता है। तो श्रम लगाया, यहाँ भी वहाँ भी, एक जगह में 10 श्रम लगा, एक जगह में 4 श्रम लगा, एक जगह में 5 श्रम लगा, सब को एकत्रित किया और उसको समान बना दिया, उतना श्रम लगा, खत्म हो गई बात। इस ढंग से एक श्रम unit निकलती है। एक गाँव के स्तर में हम average निकाल दिया।
उसको 10 गाँव के स्तर में average निकाल लिया। उसके बाद ऐसा 10 गाँव मिल करके जो बनता है एक समिति, उसके average में निकाल लिया, उसके बाद विश्व स्तर पर निकाल लिया, खतम हो गया। इसको निकालने में क्या देर लगता है? हमारे पास गणना विधि है, श्रम को पहचानने की विधि है, उपयोगिता के आधार पर। श्रम नियोजन से क्या होता है, उपयोगिता मूल्य स्थापित होता है। उपयोगिता मूल्य के आधार पर मूल्यांकन, श्रम का मूल्यांकन। कुछ भी नहीं कर सकते हैं उपयोगिता मूल्य के आधार पर मूल्यांकन है तो, आप एक श्रम के जगह में 10 दिन लगाएगें तो क्या करेगें? वो तो कुछ मिलेगा नहीं, तो हर व्यक्ति को श्रम नियोजन करना आवश्यकता बन जाएगी। और दरिद्रता कहाँ रहेगा? 20 व्यक्ति में एक व्यक्ति आज श्रम नियोजन नहीं कर रहा है, तभी भी हम दाना खा रहे हैं। एक आश्चर्य चकित बात है ये, इतना दगाबाजी के साथ भी सबको दाना मिलता है।
एक से एक दगाबाज, एक गणित आपको बताया था। हल्दी, धनिया खड़ी, एक जगह की सबसे सुगंधिदार धनिया, एक quintal 10,000/- रूपया, 5,000/-, कुछ भी मान लो 10,000/- रुपया, पिसी वोही धनिया 5,000/- रूपया। कितना अच्छी व्यापार है ये! पिसी हुई मसाला, गरम मसाला, आधा दाम में और खड़ी मसाला दुगनी दाम में, पिसी हुई हल्दी आधा दाम में और खड़ी हल्दी दुगना दाम में, आप पेपरों में देखो हर दिन। ये दगाबाजी को कोई अंत है ये? दगाबाजों के इस जमघट में, सबको दाना मिलता है आज भी, ये आलस्य वाद के घेरे में, इने गिने लोग श्रम करते हैं, उनके बदौलत इतने आदमियों को दाना मिल रहा है, ये कम चमत्कार है क्या? सबसे बड़ी चमत्कार यही है, दगाबाजों के जमघट में। यदि ये समझ में आता है तो खून सूखेगा, किसी का भी हो।
व्यापार का कुछ नमूना बताया, तरीका। परसों के दिन हम पेपर में देखते रहे धान, अपना शिखर में पहुँच गई थी, अब धान आ गया अब बिल्कुल नरमी आएगी, ये लिखा है, क्योंकि किसान को पैसा देना नहीं हैं, नरमी आएगी। उसके लिए व्यापारिक संघ का जो मूल केन्द्र है, उनके अनुमति से, जो अभी धान आएगा, उसके अनुमति से, धान का कीमत को आधा कर दिया। काहे के लिए? धान को खरीदना है। चौथाई कर दिया उनकी अनुमति से, ये लिखा रहता है। ये दगाबाजी है कि नहीं है? दिन दहाड़े दगाबाजी।
प्रश्न : श्रम मूल्य के आधार पर जब विनिमय कोश होगा, उस समय यदि यात्रा में हो आदमी?
उत्तर : आदमी अपने आवश्यकता से अधिक उत्पादन करता है, ये तो है ही है। हर परिवार के लिए अधिक वस्तु को विनिमय कोष में रखते हैं। वो issue करता है, इनके पास 10 श्रम मूल्य है, 1,000 श्रम मूल्य है, 20 श्रम मूल्य है,