27. विज्ञान
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प्रश्न : अब एक गंभीर विषय पर आते हैं बाबा, हम लोगों ने ज्ञान नाम का एक शब्द सुना है। तो आज जो विज्ञान के कुछ रूपरेखा पहले भी रही होगी, थोड़ा बहुत पढ़ते हैं, तो आधुनिक विज्ञान क्या है, उसको क्या होना चाहिए, पुराना उसका स्वरूप क्या था, या विज्ञान के दिशा धारा के बारे में आप क्या कहना चाहते हैं, मध्यस्थ दर्शन के प्रकाश में?
उत्तर : देखिए वो बात अपन पहले परिष्कृत रूप में स्पष्ट कर चुके हैं, व्याख्या कर चुके हैं। विज्ञान के अनुसार जो सारे, जितने भी धरती के साथ कुकर्म करना है उसमें हमारा गति बढ़ी। मानव के साथ जितना कुकर्म करना था, उसमें गति बढ़ी। विज्ञान का इतिहास ही, कथा ही ये बताता है सामरिक तंत्रों को बुलंद करने के लिए विज्ञानियों को पैसा दे करके, खरीद करके, सामरिक शक्तियों को बढ़ाई गई। ये बात आपको समझ में आता है? आता है, इसमें आपको कोई confusion है? confusion इनको नहीं है, ठीक है ना? [ये तो राजा युग में भी रहा होगा?] हाँ राजा युग में की ही बात है ये। ये जो कर्म-कुकर्म है ना, ये राजा युग की ही देन है, उसी को राजयोग कहलाता है। इसलिए हम ज्योतिषी को यहाँ रखा। हम बाद में छुएँगे रे! हम सेथ की चुपचाप रखे हैं। ऐसा कुकर्म करने वालों को ज्योतिष में गाया है राजयोग। मारे, पीटे, कूटें, हड़पें, धन को हड़पें, लड़कियों को हड़पें - इस कृत्यों को राजयोग लिखा है। क्या मतलब है इसका?
[देखिए बाबा, ताकत तो समाज ने और परंपरा ने उन लोगों को दे दी, वो उसका दुरुपयोग किये, उसको क्या करें?] दुरुपयोग क्या है, राजा को ये करना ही है। आप तो महाभारत पढ़िए, रामायण पढ़िए, युवराज अपने गद्दी में आ गया और महाराजा बनने के पहले राज्य का विस्तार करना है। खत्म हो गई बात, आगे चलिए।
तो इसलिए राजयुग में ही ये संपूर्ण युद्ध तंत्र का बुलंदगी हुई, ठीक है? उसको बरकरार ये गणतंत्र भी ले के ही चले आया है। ये कोई कसर नहीं छोड़ा है, ठीक है? और उसी के लिए ये विज्ञान सकल यंत्रों को बनाया। उसमें बोचक करके कुछ-कुछ लोक उपकार के लिए बन गए, जैसा गाड़ी, घोड़ा, ये जो ये यंत्र है।
(बनाने कि नियत नहीं थी?) ऐसा ओहो, अरे कहाँ लगाए पड़े हो!
(महराजजी लोकव्यापीकरण की नियत भले न रही होगी लेकिन बनाने के पीछे ऐसा नियत कैसा रहा होगा?)
शुरुआत जो है ना सामरिक प्रयोग के लिए ही पूरा दूरसंचार शुरू हुई है। ठीक से इतिहास को पढ़िये! पूरा संचार व्यवस्था जो है, ये सामरिक तंत्र के लिए बनी। संयोग क्या हो गया महाराज जी, उसके साथ व्यापार बुलन्द हो गया। अभी राजा के हाथ से बाहर बोचकने की जो बात आई, वो प्रौद्योगिकी विधि आ गई, प्रौद्योगिकी विधि आने से, जो सामरिक तंत्र के लिए जो देते हैं उतने से उद्योगपतियों का पेट भरा नहीं। कैसा हो गया? ठीक से समझो इसको। ये बोचक गया तो सब बोचकेगा! उद्योगपतियों को सामरिक तंत्र के लिए दे करके पेट नहीं भरा। तब क्या करते हैं?