21. जागृति क्रम
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प्रश्न : बाबाजी क्या पाँच अवस्था की संभावना है?
उत्तर : देखिए, यदि मानव जागृति को प्रमाणित नहीं करेगा, यदि प्रमाणित करने योग्य नहीं है, तो पाँचवी अवस्था हो जाएगी। इसमें आपको क्या तकलीफ़ है, मुझको क्या तकलीफ़ है?
(जैसे एक-दो आदमी कर रहे हैं, बाक़ी नहीं कर रहें हैं?तो पाँचवी अवस्था हो जाएगी )
यदि आप इस प्रकार से बोलते हो वो यदि एक-दो आदमी जाग्रत हुआ है, बाक़ी लोगों के लिए तो झकमारी है उसको अनुकरण करना। दूसरा कोई रास्ता ही नहीं है। यदि ये सच्चाई है जो मैं कह रहा हूँ, ये जागृति का प्रमाण है, ये परिपूर्ण है और इससे मानव जाति पूर्णतः भ्रम से मुक्त हो सकता है, उस स्थिति में पाँचवी प्रजाति का कोई अवसर नहीं है। यदि इससे होता ही नहीं है, जैसा दो प्रकार की चिंतन फैली हुई है और काला दीवाल के सामने खड़ा हुआ है, यदि ये भी काला दीवाल के सामने खड़ा होने की स्थिति में और ये चौथे प्रकार की विचार ही आएगा, नहीं तो पाँचवें प्रकार की प्रजाति ही पैदा होगा, दो में एक होगा। इसमें क्या तकलीफ़ है?
देखिए स्कोप के बारे में हम कहीं भी ताला लगाने का अधिकार नहीं होता है। स्कोप को हम सारे कल्पनाशीलता का उड़ेल करके हम स्कोप को कल्पना कर ही सकते हैं।
प्रश्न : बाबा जीवन परमाणु के आधार पर जागृति की अवस्था में मानव को विभाजन किस तरह से होता है?
उत्तर : वो तो विभाजित है ही है - भ्रमित आदमी, जागृत आदमी। भ्रमित आदमी पशु मानव, राक्षस मानव के नाम से जाना जाता है, जिनका दृष्टियाँ होती हैं प्रिय, हित, लाभ। विषय प्रवृतियाँ होतें हैं चार प्रकार, आहार आदि, चार विषय और स्वभाव होता है दीनता, हीनता, क्रूरता। कहता कुछ है, करता कुछ है, सोचता कुछ है, होता और ही कुछ है। इतना भद्दरंगी जात होता है आदमी जो पशु मानव राक्षस मानव है।
उसके बाद मानव आता है। मानव का दृष्टि बनती है न्याय धर्म सत्य। प्रधानतः न्याय को पालन करने वाला होता है, परिवार में परस्परता में सम्बंध को पहचानने योग्य होता है, मूल्यों को निर्वाह करने योग्य होता है। माँ को माँ ही समझता है, बाप को बाप ही समझता है, भाई को भाई ही समझता है, उन मूल्यों को सतत निर्वाह करता है, सुखी होता है, समृद्ध होता है, इसको मानव पद कहते हैं, नाम कहा गया है।
उसके बाद इससे और जागृति, और जागृति का प्रकाशन प्रमाण प्रस्तुत करता है देव मानव। देव मानव में दो दृष्टियाँ धर्म प्रधान होता है और धर्म सत्य प्रधान होता है। उसके बाद विषय जो होती है, केवल लोकेषणा शेष रह जाता है। मनुष्य में क्या रहता है? पुत्तेष्णा, वित्तेष्णा, लोकेषणा - तीन रहता है, उसके बदले में देव मानव में केवल लोकेषणा