14. परमाणु – 1
👉 विडिओ संदर्भ देखें: Video 06, time 33:53-1:11:44
चार प्रकार की अवस्थाएँ पहले बतायी गयी हैं - पदार्थावस्था, प्राणावस्था, जीवावस्था, ज्ञानावस्था। ये अंतर संबंध बाह्य संबंध बना हुआ है। ये सब एक साथ हैं, ये अलग-अलग कोई भी नहीं होते हैं। ये धरती नहीं होता है तो पदार्थ ही नहीं है। पहली बात तो यही है। धरती अपने में है, इसी के आधार पर सम्पूर्ण पदार्थ भी है। पहला ज्ञान तो यही है। पदार्थ ही मृद, पाषाण, मणि, धातु के रूप में उपस्थित है। इसका मूल रूप परमाणु ही है। इन परमाणु में विविध प्रकार के प्रजाति के परमाणु, परमाणु का अंशों के संख्या भेद से, प्रमाणित होना पाया जाता है। इन आधार पर विविध प्रजाति के परमाणु, अस्तित्व में होने के आधार पर, धरती समृद्ध होता है और रासायनिक क्रिया कलाप में परिवर्तित हो जाता है।
रासायनिक क्रियाकलाप का मतलब ही है, कम से कम दो प्रजाति की अणुएँ मिलकर, अपने-अपने आचरण को त्यागकर, तीसरे प्रकार के आचरण में प्रवृत्त हो जाने से है। जैसा पानी है, पानी में दो पदार्थ होता है, वो है जलने वाला और जलाने वाला। ये दोनों मिल करके अपने प्रवृत्ति को, अपने आचरण को परिवर्तित कर दिया, परिवर्तित करने के बाद ये पता चला, इसमें प्यास बुझाने वाली गुण पैदा हो गया। प्यास बुझाने का गुण जैसे ही पैदा हुआ, वो पानी का स्वरूप अलग दिखने लग गई, जलने वाला जलाने वाला स्वरूप से भिन्न हो गयी। ये दोनों चीज़ अलग हो गए, स्वरूप में भी परिवर्तन हो गया, गुण में भी परिवर्तन हो गया। इस ढंग से जल एक रासायनिक वस्तु है, मूल रसायन है, जल के बिना धरती में कहीं भी और कोई प्रगति हो ही नहीं सकती।
जल के बाद ये अम्ल और लवण रसायन पैदा होता है, तैयार होता है, फलस्वरूप इन सब के योगफल में विभिन्न प्रकार के रासायनिक द्रव्य होना पाया जाता है। इसी क्रम में अनेक प्रकार की प्रजाति की रस उपरस होना शुरू होता है। इन रासायनिक रस उपरस के आधार पर ठोस, तरल, विरल रूप में रासायनिक द्रव्य होना पाया गया, ठोस द्रव्य ही कुल मिलाकर के प्राणकोशा के रूप में अपने काम करना शुरू कर दिया। इस ढंग से पदार्थावस्था से ही प्राणावस्था का संबंध जुड़ा हुआ, अपने को समझ में आता है। यही प्राणावस्था के वस्तुएँ जब कभी मर जाते हैं, माने सूख जाते हैं, वो सब खाद हो करके धरती में मिल जाते हैं।
प्रश्न : परमाणु अंश परमाणु में कैसे परिणत होता है?
उत्तर : परमाणु अंश इसलिए परमाणु के रूप में गठित होता है - परमाणु अंशों में स्वयं प्रवृत्ति रहती है व्यवस्था में भागीदारी करने का, वो स्वयं स्फूर्त है। किस आधार पर? सत्ता उसमें पारगामी रहने के आधार पर, ऊर्जा सम्पन्न होने के आधार पर स्वयं स्फूर्त रहता है। उसी के आधार पर एक परमाणु अंश दूसरे परमाणु अंश को पहचानता है, फलस्वरूप कम से कम दो परमाणु अंशों से एक परमाणु का गठन होता है, वो व्यवस्था को प्रमाणित कर देते हैं। जिसमें श्रम, गति, परिणाम भावी हो जाते हैं, उसके बाद विकास क्रम शुरू होता है। विकास क्रम में यही होता है - श्रम के लिए विश्राम, गति के लिए गन्तव्य और परिणाम के लिए अमरत्व। ये तीन चीज़ भावी हो जाता है। उसमें से